इनके लिए मायने नहीं रखती आचार संहिता

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विधानसभा के चुनावी मौसम में आचार संहिता लागू है, लेकिन चुनाव आयोग की चेतावनी के बावजूद भी कई नेता अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। आचार संहिता के नियमों का पालन गंभीरता से नहीं किया जा रहा है। अब तो आलम यह हो गया है कि नेता आचार संहिता के उल्लंघन के नोटिस तक लेने से साफ़ मुकर रहे हैं। आचार संहिता उल्लंघन के आंकड़ों पर नज़र दौड़ाई जाए तो राजस्थान के कोटा और जयपुर इसमें अव्वल हैं।

बीते एक सप्ताह के आंकड़ों के मुताबिक आचार संहिता के उल्लंघन की कुल 510 शिकायतें चुनाव आयोग को मिली हैं। इनमें से सबसे ज्यादा शिकायतें जयपुर संभाग से और दूसरे नंबर पर कोटा से मिली हैं। जयपुर से निर्वाचन आयोग को 110 शिकायतें प्राप्त हुईं जबकि कोटा से 97 शिकायतें आयोग के पास पहुंची हैं। इन शिकायतों में से 200 पर चुनाव आयोग कार्रवाई कर चुका है। बाकी की शिकायतों में अधिकांश शिकायतें पोस्टर और बैनरों से संबंधित हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा में महेंद्रजीत मालवीया और उदयपुर में उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी को इस मामले में नोटिस थमा दिया गया है।

आचार संहिता के उल्लंघन के लिए बांसवाड़ा में राज्य मंत्री धनसिंह रावत और जयपुर में भाजपा के बागी नेता और निर्दलीय विधायक ज्ञानदेव आहूजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। नदबई में बसपा के प्रत्याशी को आचार संहिता के उल्लंघन पर नोटिस थमाया गया है। इसके अलावा धौलपुर में पूर्व विधायक जसवंत सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज़ किया गया है। अजमेर संभाग में मंत्री वासुदेव देवनानी, अनिता भदेल, संसदीय सचिव सुरेश रावत, महापौर धर्मेद्र गहलोत सहित कई प्रत्याशियों के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किए गए हैं।

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