मोदी लहर भी नहीं बचाई पाई थी इन नेताओं की कश्ती

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मध्यप्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान चौथी बार अपनी सरकार बनाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भाजपा के विजयी रथ को रोकने को बेकरार है। इधर, तीसरे मोर्चे में बसपा, सपा, सपाक्स और ‘आप’ ने भी प्रदेश में ज़मीन तलाशना शुरू कर दी है। 2013 विधानसभा चुनाव में मोदी लहर का काफी प्रभाव था। भाजपा के कई नेता इस लहर में जीत गए वहीं कई ऐसे नेता भी थे, जिनकी कश्ती मोदी लहर में डूब गई।

प्रदेश में हैट्रिक लगा चुकी भाजपा अब जीत का चौका लगाने के लिए अपना दमखम दिखा रही है। पिछले चुनाव में कई नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि इस बार भी इनमें से कई प्रत्याशी फिर मैदान में उतरने को तैयार हैं।

अनूप मिश्रा

अनूप मिश्रा को पिछले चुनाव में भितरवार विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी लाखनसिंह यादव ने 6548 वोटों से हराया था। चार बार विधायक रहे मिश्रा को मोदी लहर नहीं बचा पाई। हालांकि अनूप 2014 के लोकसभा चुनाव में मुरैना से सांसद बन गए, लेकिन उनके विधानसभा चुनाव में उतरने के कयास लगाए जा रहे हैं।

रामकृष्ण कुसमरिया

रामकृष्ण कुसमरिया पिछले चुनाव में राजनगर सीट से हार गए थे। उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमसिंह ने 8607 वोटों से हराया था। चार बार विधायक और दो बार सांसद रहे चुके कुसमरिया पिछला चुनाव हार गए थे। वे एक बार फिर कुसमरिया चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

जगन्नाथ सिंह

विंध्य अंचल में भाजपा का बड़ा चेहरा और मंत्री रहे जगन्नाथ सिंह को पिछले चुनाव में चितरंगी विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी सरस्वती सिंह ने 9845 वोटों से हराया था।

हरिशंकर खटीक

पिछले चुनाव में टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा सीट पर मंत्री रहे हरिशंकर खटीक और कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश अहिरवार के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। खटीक को महज़ 233 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। हरिशंकर इस बार भी चुनाव में उतरने का दमखम दिखा रहे हैं।

अजय विश्नोई

अजय विश्नोई को जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें कांग्रेस के नीलेश अवस्थी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। दोनों के बीच हार-जीत का अंतर 12736 वोटों का था।

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