भाजपा के मंत्रियों की जीत के लाले

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प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का दावा कर रही भाजपा की भीतरी हालत कुछ ज्यादा ही ख़राब है| एक ओर प्रदेश में भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा में प्रदेश के मुख्यंमंत्री शिवराजसिंह चौहान दोगुने उत्साह के साथ जीत के लिए जनता से मिल रहे हैं, वहीँ पार्टी के भीतर हुए सर्वे ने नेताओं की नींद उड़ा दी है| इस सर्वे में कई विधायकों की हालत पतली है और इसे लेकर भाजपा संगठन भी सकते में है|

प्रदेश में चुनाव में मद्देनज़र करवाए गए सर्वे में यह बात तो पहले ही सामने आ चुकी है कि आने वाले चुनाव में 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट कटना है, लेकिन इनमें कुछ मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें यदि मैदान में उतारा जाता है तो वे अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे| ये वही मंत्री हैं, जिनका अपने क्षेत्र में ख़ासा प्रभाव हैं, लेकिन बीते साढ़े 4 वर्षों में इनके जनाधार का ग्राफ तेजी से गिरा है|

प्रदेश के उन मंत्रियों में जयंत मलैया दमोह, गौरी शंकर शेजवार सांची, पारस जैन उज्जैन, सुरेन्द्र पटवा भोजपुर, शरद जैन जबलपुर, गौरीशंकर बिसेन बालाघाट, और ओमप्रकाश धुर्वे शाहपुरा से सबसे कमजोर स्थिति में हैं|

इन मंत्रियों की सीट पर जमानत जब्त होने का खतरा है| भाजपा संगठन के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार वर्तमान में 185 में से 70 विधायक ही जीत की स्थिति में हैं| ऐसे में आगामी चुनाव में भाजपा की जीत को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई है| ऐसे में विधानसभा चुनाव में कई टिकट ऐसे भी हो सकते हैं, जिनके पीछे संघ कार्य करे क्योंकि चुनाव में संघ अपने स्तर से रणनीति बनाता है और संघ के नेताओं के पीछे भी एक पूरी अलग टीम होती है|

ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा में कई नए चेहरों पर दांव लगाया जा सकता है और वर्तमान नेताओं को घर बैठाया जा सकता है|

पॉलिटिकल डेस्क

 

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