राजस्थान में भाजपा का जीतना मुश्किल

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इस वर्ष के अंत में शुरू होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की हालत खराब है। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार किसानों, शिक्षकों और कर्मचारियों के गुस्से का सामना कर रही है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी रमनसिंह के सामने आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और जनता कांग्रेस खड़ी है। बात करें राजस्थान की तो यहां भाजपा का जीतना काफी मुश्किल नज़र आता है।

आइए, नज़र डालें राजस्थान में भाजपा की हालत पर :

दिग्गज नेता ने छोड़ा साथ 

भाजपा के दिग्गज नेता विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी खुद की पार्टी का गठन कर लिया है, जिसका नाम है भारत वाहिनी पार्टी। आगामी चुनाव में तिवाड़ी की पार्टी प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा

हाल ही में भाजपा की तरफ से करवाए गए भौतिक सत्यापन में खुलासा हुआ कि प्रदेश के 51 हजार बूथ कमेटियों के लगभग 50 फीसदी यानी 25 हजार बूथ अध्यक्ष फर्जी हैं। भाजपा ने प्रदेश में 51 हजार बूथ बना रखे हैं, जिनका पूरा ब्योरा पार्टी कार्यालय में मौजूद है। उसके अनुसार, पार्टी ने फोन पर सत्यापन करवाया, जिसमें सामने आया कि कुल 51 हजार में से 25 हजार बूथ और अध्यक्ष मौजूद ही नहीं हैं।

प्रदेश अध्यक्ष पर कोई फैसला नहीं

जहां एक तरफ उनके विधायक ने पार्टी छोड़ दी, वहीं राज्य में भाजपा अभी तक प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पाई है। अशोक परनामी के इस्तीफे के बाद अभी तक नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर कोई फैसला नहीं हुआ हैं। हाईकमान और सीएम के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन नया नाम अब तक तय नहीं हुआ है।

उपचुनाव में हार

अजमेर और अलवर की दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार मिली। अलवर में कांग्रेस के उम्मीदवार करणसिंह यादव ने भाजपा के जसवंत यादव को 1,56,319 वोटों के अंतर से हराया। वहीं अजमेर में कांग्रेस के रघु शर्मा ने भाजपा के रामस्वरूप लांबा को 20,648 मतों से हराया। वहीं विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। भीलवाड़ा के माण्डलगढ़ में कांग्रेस ने जीत का स्वाद चखा।

राहुल की सक्रियता

राजस्थान चुनाव में राहुल गांधी खुद पूरा ज़ोर दे रहे हैं। राहुल गांधी की टीम ने राजस्थान के चुनाव प्रचार के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया। राहुल और उनकी टीम चुनावी रणनीति से लेकर पूरे कैंपेन को नजदीक से नियंत्रित करेंगे। कांग्रेस चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व को अपना हथियार बनाने वाली हैं। वहीं राजस्थान में राहुल की सक्रियता और भाजपा के आपसी मनमुटाव का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलते दिख रहा है। इन नतीजों से तय है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपना रास्ता मुश्किल कर लिया है। चुनाव से पहले भाजपा के लिए खतरा दिखने लगा है।

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