ज़ीका वायरस का कहर…

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मानसून की विदाई के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रवेश शुरू हो जाता है। ऐसा पिछले कुछ सालों से लगातार हो रहा है| देश के विभिन्न भागों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू आदि संक्रमित बीमारियों ने अपना प्रकोप दिखाया। इन चर्चित और प्रचलित बीमारियों के बाद अब ‘ज़ीका’ नाम के नए वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। पहले ज़ीका वायरस पीड़ित कुछ मरीज  जयपुर में मिले। जयपुर में ज़ीका वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या साठ तक पहुंच गई है। ज़ीका वायरस अभी जयपुर में अपना दायरा बढ़ा रहा है और यहां से अन्य राज्यों की सीमाओं में भी प्रवेश कर सकता है।

Zika virus positive

ज़ीका वायरस का संबंध अफ्रीका के ज़ीका जंगल से है। जहां 1947 में अफ्रीका विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक पीले बुखार पर रिसर्च करने के लिए एक लंगूर लाए। इस लंगूर को हुए बुखार की जांच की गई, जिसमें पाए गए संक्रामक घटक को जंगल का ही नाम ज़ीका दिया गया। इसके बाद 7 वर्ष बाद 1954 में नाइजीरिया के एक व्यक्ति में यह वायरस पाया गया। ज़ीका वायरस के सबसे ज्यादा मामले पहली बार 2007 में अफ्रीका और एशिया के बाहर देखने को मिले थे। अब 2018 में ज़ीका वायरस ने जयपुर में दस्तक दे दी। ज़ीका वायरस डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह मच्छरों से फैलता है। यह एक एडीज मच्छर है, जो दिन में सक्रिय रहते हैं। यदि यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है. जिसके खून में वायरस मौजूद है, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है। ज़ीका वायरस से संक्रमित कई लोग खुद बीमार महसूस नहीं करते, लेकिन इसमें बुखार, थकान, जोड़ और सिरदर्द होता है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि यदि किसी गर्भवती महिला को हो जाए तो गर्भ में पल रहे बच्चे को भी यह बुखार हो सकता है, जिस वजह से बच्चे की मौत हो सकती है।

इधर, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने शुरूआत में ज़ीका वायरस को लेकर गंभीरता नहीं बरती। जयपुर नगर निगम आंखों पर पट्टी बांध सोता रहा, जब वायरस का प्रकोप बढ़ा, तब नींद टूटी। अब इस पर काबू पाने के उपायों पर काम किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सरकार को मौसमी बीमारियों को लेकर इनके शुरू होने के समय के साथ ही सार्वजनिक स्तर पर सर्तकता अभियान शुरू कर देना चाहिए। ज़ीका वायरस मच्छरों से फैलता है। मच्छरों की वजह से ही राजस्थान में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया का प्रकोप सालों से बना हुआ है। राजस्थान ही नहीं बल्कि दिल्ली और अन्य कई उत्तर भारतीय राज्यों में इन मौसमी बीमारियों का कहर हर वर्ष चिंता का विषय बना रहता है। इन दिनों भी कई राज्यों में डेंगू का प्रकोप बना हुआ है। कई राज्यों में डेंगू रोगियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन राजस्थान में हालात ज्यादा खराब हैं। ज़ीका वायरस के साथ राज्य में डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू के मामले भी सामने आए हैं।

आज कई देश इन मौसमी बीमारियों से मुक्ति पा चुके हैं, लेकिन हमारे देश में लोगों को मच्छरों से आज़ादी नहीं मिल रही है। हमारा ध्यान मरीजों के उपचार पर जाता है, लेकिन मच्छरों के लार्वा को खत्म करने को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं करते। मौसमी बीमारियां हर साल परेशानी बनकर सामने खड़ी हो जाती है और अब इस ज़ीका वायरस ने हमें चेताया है।

-कुशाग्र वालुस्कर

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