जीवन में आवश्यक है पुस्तकें …

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अंग्रेजी में एक कहावत है जिसका हिंदी अर्थ ये है की- “आज से पांच साल बाद आप जो बनने वाले है उसमें दो चीजें सबसे ज्यादा अंतर डालेगी- पहली की इस बीच आप किन व्यक्तियों से मिलतें है और दूसरा आप कौनसी किताबें पढ़ते है।”

पढ़ना एक ऐसी आदत है जो अगर आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल नहीं  है तो यकीन मानिये आपसे ‘कुछ’ छूटे जा रहा है। पढ़ने की आदत ऐसी होना चाहिए जैसे सांस लेना। दुनिया मे इतना कुछ है पढ़ने को कि अगर किसी एक मनपसन्द विषय को चुन लिया जाए तो भी उसका पूरा ज्ञान अर्जित करने में, सारी उपलब्ध किताबों को पढ़ने के लिए ये जीवन छोटा पड़ सकता है।
कहतें है किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती है। भगतसिंह जब जैल में कैद थे तब अपने आखिरी वक्त में वो लेनिन की एक किताब पढ़ रहे थे। महात्मा गांधी ने भी जेल  में ही कई किताबें लिखी थी। किताबें पढ़ने से ना सिर्फ वक्त अच्छे से कटता है बल्कि सोच को नए आयाम मिलतें हैं। किताब पढ़ने वालों की सोच और समझ बाकीयों की तुलना में ज्यादा विकसित और प्रभावी हो जाती है।
भारत में 90 के दशक तक बच्चे रंग-बिरंगी कॉमिक्स के संसार मे उलझे रहते थे। चाचा-चौधरी, साबू, बिल्लू, पिंकी, बिंदु, नागराज औए फैंटम जैसे पात्र बच्चों  के चहेते हुआ करते थे। चंपक-नंदन जैसी वन्य जीवन के पात्रों की कहानियां भी बच्चे बड़े चाव से पढ़ते थे। इसके अलावा पंचतंत्र जैसी प्राचीन कहानियां हमारी संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। गांव में आज भी बच्चे रात को दादी-नानी से कहानी सुनने के बाद ही सोने जाते हैं। इन सब बातों का मकसद यही था कि कैसे भी करके बच्चे के जीवन में पुस्तकों का प्रवेश करा दिया जाए। दुनिया की बात करें तो हेरी पॉटर के जादू ने दुनियाभर के बच्चों को इतना लुभाया कि इसे लिखने वाली जे के रोलिंग दुनिया की सबसे अमीर महिला बन गयी। हेरी पॉटर ने बच्चों के साहित्य में एक अलग ही योगदान दिया। आज के स्मार्ट फ़ोन युग मे डिजिटल किताबें पढ़ने का दौर शुरू हो चुका है और अमेज़न किंडल जैसे माध्यम से अब ई-बुक पढ़ी जा रही है।
खेर, माध्यम कोई भी हो असली बात यह  है कि पुस्तक पढ़ने की आदत कभी छूटनी नहीं  चाहिए। अगर आप कोई किताब नहीं पढ़ते  तो आज से ही शुरू कर दीजिये। अपने मनपसंद विषय पर उपलब्ध अनेकों किताबों में से कोई भी किताब चुनकर आप शुरूआत कर सकते  हैं ।  ऐसा करने के लिए आज “विश्व पुस्तक दिवस” से बेहतर दिन भला कौन सा हो सकता है? इस नए संकल्प के साथ ही विश्व पुस्तक दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं..
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