हवा, पानी और वृक्ष ने खोल दी आँखें

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आज सुबह 5 बजे मैं घर से टहलने के लिए निकला, जब मैं पलासिया पहुंचा तो मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दीं| मैंने इधर-उधर झांककर देखा तो मुझे वहां दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दिया| मैं सोच में पड़ गया कि जब आसपास कोई नहीं है तो आवाजें कहां से आ रही हैं| मैंने ध्यान से सुना तो पता लगा कि पलासिया के कोने का पेड़ का ठूंठ, वहां बह रही हवा और समीप स्थित दूषित खान नदी या अब कहें तो नाला आपस में बात कर रहे थे| मैं अचरज में पड़ गया | मैं वहीं पुलिस थाने के समीप के बस स्टॉप पर बैठकर उनकी बातें सुनने लगा|     

सबसे पहले हवा बोली – क्या तुम दोनों को पता है कि आज पर्यावरण दिवस है| आज पर्यावरण संरक्षण को लेकर शहर में एक बहुत बड़ा आयोजन है| उस कार्यक्रम में 1 लाख पौधे लगाए जाएंगे|

इस पर पेड़ का ठूंठ मुंह चिढ़ाकर बोला, बड़े देखें हैं ऐसे कार्यक्रम| हर साल ये लोग पर्यावरण दिवस पर इसी तरह लाखों पौधे लगाते हैं और अगले दिन उन्हें भूल जाते हैं | न तो कोई उन्हें खाद-पानी देता है और न ही उनकी देखभाल करता है| सालभर सभी अपने घरों में सुस्ताते हैं और इधर पौधे सूख जाते हैं| जानते हो पहले इस पलासिया क्षेत्र में कई पेड़ थे, परंतु विकास के नाम पर कई पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई यो वहीं कई को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया| कभी क्षेत्र का बड़ा और हराभरा कहलाने वाला मैं भी आज सिर्फ ठूंठ रह गया हूं|

इस पर नदी बोली बिलकुल सच कह रहे हो पेड़ भाई, एक जमाने में मुझमें लोग नाव से सफ़र करते थे| मेरे किनारे घंटों बैठे रहते थे, परंतु आज मेरे पास से नाक-भौं सिकोड़कर निकलते हैं, कोई मेरे करीब आना नहीं चाहता है| मुझमें आसपास के क्षेत्र के 120 नाले मिलते हैं | इंसानों ने मुझे गंदगी फेंकने का कूड़ेदान बना दिया है| कितनी सरकारें आईं और गईं, सभी ने नदी की सफाई के सिर्फ आश्वासन दिए, उन्हें पूरा कोई नहीं कर पाया| नेता दशकों से वादे कर रहें हैं, परंतु मेरी सफाई नहीं हो पाई| भले ही शहर देश में स्वच्छता के मामले में नंबर 1 हो गया हो,   परंतु मैं आज भी दूषित और बदबूदार ही हूं|

हवा बोली मुझे तो पर्यावरण दिवस के इस कार्यक्रम का पता चला तो मैंने बता दिया वैसे मुझे मानव के स्वार्थी स्वभाव के बारे में अच्छी तरह पता है| आज से दस साल पहले शहर की आबोहवा लोगों को काफी सुकूनदायक लगती थी| आज शहर के लोगों ने मुझे दूषित कर दिया है| असंख्य गाड़ियों और बढ़ते उद्योगों के कारण सब दूर धुएं और धूल का साम्राज्य है| पेड़ भाई तुम रहते तो मैं शुद्ध रहती, परंतु इन्होंने तुम्हारी संख्या कम कर इस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है| प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मप्र में  इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, सागर एवं गुना में मैं सबसे ज्यादा प्रदूषित होती हूं। इन शहरों में आरएसपीएम की मात्रा तय मानक 100 से चार गुना अधिक तक पाई गई है|

इनकी बातें सुनते-सुनते कब आठ बज गए, पता ही नहीं चला| कुछ ही देर में वाहनों की रेलमपेल शुरू हो गई, जिसमें इनकी बातें दब गई, परंतु इन बातों ने मुझे झिंझोड़कर रख दिया| मैं सोचने लगा कि सचमुच हम मनुष्य कितने स्वार्थी हैं | कहते हैं जो गड्ढा खोदता है वही उसमें गिरता है| हम भी प्रकृति की उपेक्षा कर ऐसे ही गड्ढा खोद रहे हैं, जिसके कई दुष्परिणाम तो हमें आज से ही दिखाई दे रहे हैं| पेड़ हम काटते हैं, जल और वायु प्रदूषण हम करते हैं और कोसते हैं प्रकृति को| सच ही कहा इन तीनों ने हमें इनकी बातों पर ध्यान देकर पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाने होंगे|

-अंकुर उपाध्याय

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