ये कैसी क्रांति? मोदी जवाब दो 

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आपने श्वेत क्रांति, हरित क्रांति और आईटी क्रान्ति के बारे में तो बहुत बार सुना होगा, परंतु गुलाबी क्रांति (पिंक रिवोल्यूशन) के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं| दरअसल, भैंस का मांस यानी बीफ या गोमांस के निर्यात को ‘पिंक रिवोल्यूशन’ कहा जाता है|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान इस शब्द का प्रयोग किया था| तब उन्होंने कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था, “दिल्ली में बैठी हुई सरकार का सपना है कि हम हिंदुस्तान में पिंक रिवोल्यूशन करेंगे और पूरे विश्व में मांस-मटन का एक्सपोर्ट का बिजनेस करेंगे| इस वर्ष स्वयं भारत सरकार ने घोषित किया है कि पूरे विश्व में बीफ एक्सपोर्ट में हिंदुस्तान नंबर वन है| किन चीजों के लिए गर्व किया जा रहा है भाइयों और बहनों ? आपका कलेजा रो रहा है या नहीं, मुझे मालूम नहीं, मेरा कलेजा चीख-चीख कर पुकार रहा है| आप कैसे चुप हैं, कैसे सह रहे हैं, मैं समझ नहीं पा रहा हूं|”

तब लोगों को लगा था कि मोदी जी आएंगे, तो देश में हो रही है इस नई तरह की क्रांति पर रोक लगेगी| मोदीजी का कार्यकाल खत्म होने के कगार पर है, परन्तु इस पर रोक लगने के बजाय यह क्रांति उनके कार्यकाल में ही तेज़ी से बढ़ रही है।

तब प्रधानमंत्री भले ही मांस निर्यात को लेकर कांग्रेस सरकार को कोस रहे थे, परन्तु सच्चाई यह है कि मोदी के कार्यकाल में ‘पिंक रिवोल्यूशन’ और मज़बूत हुआ है, और बढ़ा है| अमेरिका कृषि विभाग (यूएसडीए) के अनुसार भारत दुनियाभर के  गोमांस  निर्यातक देशों की सूची में प्रथम स्थान पर है। यह स्थिति तब है, जब देश के कई राज्यों में गोहत्या प्रतिबंधित है। भारत 2014 में ब्राजील को पछाड़कर इस सूची के शीर्ष पर आ गया।

देश में गोमांस पर प्रतिबंध लगा है, इसके बावजूद देश के कई राज्यों से बीफ (भैंस का मांस) के नाम पर गोमांस का धड़ल्ले से निर्यात हो रहा है| बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना में दर्ज एफआईआर से इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ है| रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम पांच राज्यों से फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे गोमांस का कारोबार किया जा रहा है|

16 करोड़ का गोमांस बरामद

जनवरी और फरवरी 2018 के दौरान इन राज्यों में लगभग 1,011 टन संदिग्ध गोमांस बरामद किया जा चुका है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 16 करोड़ रुपए आंकी जा रही है| वहीं इन राज्यों में पुलिस द्वारा जब्त मीट के 9 सैंपल को फॉरेंसिक साइंस लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया| इन 9 सैंपल में से 7 में गोमांस पाया गया|

इस रिपोर्ट ने देशभर में लगभग एक दर्जन मीट निर्यात कंपनियों को जांच के घेरे में ले लिया है| दिल्ली आधारित वर्टेक्स एग्री प्रोडक्ट और ग्लोबल फूड इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन भी गोमांस के कारोबार में शामिल पाई गई हैं, जिनके खिलाफ कई राज्यों में आधा दर्जन से अधिक मामलों में जांच चल रही है| वहीं वर्टेक्स एग्री के मालिकों के खिलाफ अरेस्ट वारंट और लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है|

वर्ष 2014-15 के दौरान भारत ने 24 लाख टन मीट निर्यात किया, जो दुनिया में निर्यात किए जाने वाले मांस का 58.7 फीसदी हिस्सा है। विश्व के 65 देशों को किए गए इस निर्यात में सबसे ज्यादा मांस एशिया में (80 फीसद) और बाकी अफ्रीका को भेजा गया। वियतनाम तो अपने कुल मांस आयात का 45 फीसद हिस्सा भारत से मंगवाता है। दूसरा नंबर ब्राजील का है, जिसने 20 लाख टन निर्यात किया जबकि ऑस्ट्रेलिया 15 लाख टन निर्यात करके तीसरे नंबर पर रहा।

वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी (डीजीसीआईएस) निदेशालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 लाख 66 हज़ार 700 किग्रा के गोमांस के निर्यात को मंज़ूरी दी है। अप्रैल 2017 से सितम्बर 2017 के बीच भारत ने पाकिस्तान को 5 हज़ार 12 टन गोमांस निर्यात किया, जिसके लिए 11 हज़ार 93 गायों को काटा गया। इनमें से उत्तरप्रदेश में 7,018 गायों को काटा गया। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान को जो गोमांस निर्यात किया गया, उसमें से 91% उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र ने निर्यात किया।

विडम्बना है कि मांस निर्यात को रोकने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नरेंद्र मोदी भी सरकार आते ही इस मामले में फिसड्डी साबित हुए हैं| उनके कार्यकाल में बीफ एक्सपोर्ट बंद होने के बजाय बढ़ गया है| सुनने में यह थोड़ा अजीब ज़रूर लग रहा है, लेकिन ये कोई विपक्ष के आरोप नहीं है, बल्कि सरकार ने ये आंकड़े खुद संसद के पटल पर रखे हैं। इन आंकड़ों की माने तो भारत मांस निर्यात के मामले में अग्रणी देशों में शुमार है। साल 2016-17 में मांस निर्यात में कमी आने के बजाय यह 17 हज़ार टन बढ़ गया है। तत्कालीन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये आंकड़े एक प्रश्न के लिखित जवाब के तौर पर राज्यसभा में दिए थे।

2015 में 13 लाख टन से अधिक मांस निर्यात किया गया, जबकि 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 18 लाख टन हो गया था। वर्तमान में यह आंकड़ा और बढ़ गया है| गोमांस निर्यात के विशाल वैश्विक आंकड़े एक करोड़ टन को भी पार कर चुके हैं। हालांकि रुपए के हिसाब से देखा जाए तो निर्यात घटकर 27,184 करोड़ रुपए का रह गया है, जो साल 2015-16 में 27,528 करोड़ रुपए का हुआ था। आईसीएआर ने भारत के गोमांस निर्यात में प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्रियों के अलग-अलग विचार

जनता की इस संबंध में राय है कि पीएम मोदी की 2014 की मंशा के मुताबिक ‘पिंक रिवोल्यूशन’ बंद हो, परन्तु भाजपा सरकार के मुख्यमंत्रियों के ही इस संबंध में अलग-अलग विचार हैं| एक ओर यूपी में योगीजी ने आते ही अवैध बूचड़खानों पर कैंची चलाई थी और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने गुजरात को शाकाहारी राष्ट्र बनाने की इच्छा जाहिर की थी वहीं दूसरी ओर गोवा के सीएम ने एक सभा में कहा था कि बीफ की कमी नहीं होने दी जाएगी,  कम पड़ा तो दूसरे राज्यों से मंगवाया जाएगा।

भाजपा गोमांस का व्यापार करने वाली कंपनियों से चंदा भी ख़ुशी-ख़ुशी लेती है। 2014  के लोकसभा चुनाव में गोमांस का व्यापार करने वाली तीन बड़ी कंपनियों, फ्राइगरिफोरो अल्लाना लिमिटेड, फ्रिजेरिओ कनवेर्वा अल्लाना लिमिटेड और इंडग्रो फूड्स लिमिटेड ने भाजपा को दो करोड़ का चंदा दिया था। ये तीनों कम्पनियां अल्लानासंस की हैं, जिसे वाणिज्य मंत्रालय़ ने ‘प्रीमियम ट्रेडिंग हाउस’ का दर्जा दिया हुआ है।

आज जब अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकार है और सरकार बिना किसी विरोध के बीफ और गोमांस की बिक्री और निर्यात बंद करवा सकती है तो आखिर ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है| 2014 के चुनाव के पूर्व कांग्रेस के सामने तो मोदी ने काफी सवाल उठाए थे| अब जब उनके पास पॉवर है तो वे इसका प्रयोग क्यों नहीं कर रहे हैं| क्या चुनाव पूर्व उनके द्वारा दिए भाषण मात्र राजनीतिक शिगूफा थे, मांस निर्यात के खिलाफ उनके बयान क्या सिर्फ वोट बटोरने का साधन थे, यह विचारणीय प्रश्न है|

-अंकुर उपाध्याय

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