अमरीका ट्रंप की दुकान है क्या ?

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमरीका की भलाई के लिए कोई कठोर कदम उठाते हैं तो उसमें कुछ बुराई नहीं है, लेकिन आजकल उन्होंने विदेशों से आयात होने वाली चीजों पर भारी-भरकम टैक्स लगाकर बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है। सबसे पहले उन्होंने चीन को सबक सिखाने की ठानी। चीनी चीजों पर जैसे ही उन्होंने ज्यादा तटकर ठोका, चीन ने अमेरिकी चीजों पर उनसे भी ज्यादा तटकर ठोक दिया। ईंट का जवाब पत्थर से मिला। चीन की अटपटी व्यापार नीति और काॅपीराइट नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध अमरीकी कार्रवाई जरुरी भी थी, लेकिन भारत और यूरोपीय देशों ने अमरीका का क्या बिगाड़ा था ? उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कौन-से नियमों का उल्लंघन किया था ? इन मुक्त और सही व्यापार करने वाले राष्ट्रों ने भी ट्रंप को शीर्षासन करवा दिया है। भारत ने अमरीका को बेचे जानेवाली स्टील और एल्युमिनियम पर लगी 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की डयूटी के जवाब में उससे खरीदी जाने वाली 29 चीजों पर ऐसी और इतनी ड्यूटी की घोषणा कर दी है कि अमरीका को अब घाटा होने लगेगा। अमरीकी खरीदार को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।

भारतीय खरीदारों को भी यही भुगतना होगा। इससे मुक्त विश्व-व्यापार की धारणा को गहरी चोट पहुंचेगी और दुनिया के उपभोक्ताओं को नई महंगाई का शिकार होना पड़ेगा। हो सकता है कि चीजों का उत्पादन भी घटे। उसके कारण बेरोजगारी भी बढ़ेगी। अमरीका के फायदे की नीयत से किया गया ट्रंप का यह काम अमरीका का नुकसान ही करेगा। ट्रंप ने सत्तारुढ़ होने के बाद ऐसे कई कदम उठाए हैं, जो अमरीका के विश्व शक्ति होने की हैसियत को घटाते हैं। जैसे वीजा नियमों में भारी फेरबदल, कई संकटग्रस्त क्षेत्रों से अमरीकी फौजों की वापसी, कई राष्ट्रों को दी जानेवाली मानवीय सहायता पर रोक, सं.रा. संघ के कई कार्यक्रमों का बहिष्कार, प्रशांत क्षेत्र के संगठन का बहिष्कार, यूरोपीय संघ से मनमुटाव आदि ! ट्रंप दुनिया के सबसे संपन्न और सबल राष्ट्र अमरीका को अपनी व्यक्तिगत दुकान की तरह चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी नीतियों से सारी दुनिया असमंजस में तो पड़ ही गई है| अमरीका में भी उनका विरोध बढ़ता जा रहा है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि ट्रंप या तो बहुत भोले हैं या फिर बेहद अक्खड़ हैं। उन्होंने जैसा परमाणु-सौदा उ.कोरिया के किम से करते हुए व्यावहारिकता का परिचय दिया, वैसा ही यदि वे व्यापारिक मामले में भारत के साथ दें तो निश्चय ही भारत-अमरीका संबंध नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। यदि ट्रंप अपनी वाली पर अड़े रहे तो अमरीका और भारत के बीच अरबों-खरबों रु. तक बढ़ने वाले व्यापार की नई संभावना पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

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