हम पत्तों को पानी दे रहे, जड़ों को सींचें

0

विश्व जागृति मिशन के संस्थापक आचार्य  सुधांशु महाराज को भी चंडीगढ़ में आसाराम बापू के समर्थक धमका चुके हैं। यह ख़ुलासा खुद उन्होंने चर्चा के दौरान किया। कथावाचकों ने आसाराम की उम्रक़ैको सुधांशु महाराज ने बहुत कठोर और उपयुक्त फैसला बताया। वे अभय प्रशाल में अनुयायियों से संवाद के लिए आए थे। उससे पूर्व मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में किसी पत्रकार ने एक लिखित पर्चा देते हुए पूछा था कि क्या मरी हुई गाय को स्पर्श कर कोई जीवित कर सकता है, पेड़ को इशारा कर रास्ते से हटने को कह सकता है…।

मैंने कहा ये विज्ञान का ज़माना है और ऐसा कोई कहता है तो मैं सरासर झूठ मानता हूं। अगली सुबह तो दो बस भरकर लोग हंगामा करने आ गए। मुझे बताया गया कि आसाराम बापू के समर्थक नाराज़ हैं कि आप ने बापू को झूठा कहा है। मैंने दस लोगों को चर्चा के लिए बुलाया और समझाया कि मुझे पता नहीं कि ऐसा बापू ने कहा है। वे लोग कहने लगे कि आप को सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगना पड़ेगी नहीं तो आपका प्रवचन नहीं होने देंगे। मेरी बात समझने को तैयार नहीं हुए तो मैंने कहा, कल मीडिया में विज्ञापन देकर एक करोड़ का ईनाम रखता हूं कि मरी हुई चुहिया को स्पर्श कर जीवित करने वाले को एक करोड़ का इनाम दूंगा। मेरे इस निर्णय के बाद वे लोग ठंडे पड़े।

सुधांशु महाराज का कहना था कि देश में 65 लाख साधु हैं| न सब ग़लत हैं न सब सही, लेकिन जो ग़लत हैं, जिनसे समाज बदनाम होता है, उन्हें न्यायालय आदि दंडित भी करते हैं। यह कठोर फ़ैसला समाज के लिए भी संदेश है। अब बापू को जेल की कोठरी में अपना सारा समय ध्यान पर लगाना चाहिए। कठुआ और उन्नाव जैसी घटनाओं पर उनका कहना था यह सारा वातावरण क़ानून और अभिभावकों की सख़्ती न होने से बन रहा है। सत्कर्म की बातें 40 वर्ष से ऊपर वाले करते हैं और कुकर्मों में ज़्यादातर युवा पीढ़ी सामने आ रही है। विदेशों में घरों में जैमर लगे हैं कि बच्चे मोबाइल में क्या नहीं देख सके।

हमारे यहां कहां हैं ऐसे बंधन, परिवारों में बच्चे एकांत पसंद करते हैं तो इसलिए कि उनकी चैटिंग में रोका-टोकी न हो। वे क्या देख रहे हैं मोबाइल पर, हमें पता नहीं चलता और परिजन के बोलने का असर भी नहीं होता। दरअसल हम जड़ नहीं पत्तों में पानी डाल रहे हैं। सरकार को भी नेट आदि को लेकर क़ानून में सख़्ती करना चाहिए।

-कीर्ति राणा

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Share.