विपक्ष की एकता, भाजपा के लिए खतरा

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भाजपा सरकार अपने सहयोगी दलों से मनमुटाव के दौर से गुजर रही हैं। वहीं दूसरी और विपक्ष का एक होना भी मोदी सरकार के लिए आने वाले वक्त में खतरा बनते जा रहा है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जहां अपने पुराने सहयोगियों से मुलाकात कर रहे हैं, वहीं एनडीए के पुराने सहयोगियों में से एक शिवसेना से रिश्तों में खटास पड़ती जा रही है। अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच मुलाकात भी हुई, लेकिन बात नहीं बनी। शिवसेना मे साफ कर दिया कि वह अगले चुनाव में भाजपा से कोई गठबंधन नहीं करेगी।

बात केवल शिवसेना की नहीं है। भाजपा के सभी सहयोगी दल किसी न किसी वजह से नाराज है। न उससे पुराना सहयोगी शिरोमणि अकाली दल खुश है और न ही बिछड़कर साथ आने वाले जेडीयू। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान भी समयसमय पर अपनी नाराजगी जाहिर करते है, वहीं चंद्रबाबू नायडू ने अपना रास्ता ही अलग कर किया है। कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने जीत हालिस की, लेकिन बहमुत ना साबित करने के कारण बीएस येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद विधानसभा और लोकसभा के उपचुनावों के नतीजों ने भी भाजपा को निराश किया। 2014 में लोकसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद बीजेपी को लगातार उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में मात्र दो सीटें जीतने वाला जेडीयू अगले लोकसभा चुनाव के लिए 25 सीटें भाजपा से मांग रहा है। जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि 2019 लोकसभा  में बिहार का चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और जेडीयू ने गठबंधन करते हुए25 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 22 सीटों पर कब्जा किया था। लेकिन अब जेडीयू की मांग तर्कहीन है। जेडीयू चाहती है कि भाजपा उन्हें बड़े भाई की भूमिका निभाने दें, नहीं तो अगर जरूरत पड़ी तो वह एनडीए से बाहर निकल सकते हैं।

राजनीति का ये सभी घटनाक्रम बीजेपी के लिए चिंता की बात है। कर्नाटक  हुई विपक्षी एकता के कारण बीजेपी सरकार बनाने में चूक गई। वहीं दूसरी और विपक्ष का एक होना भी भाजपा के लिए खतरा है। विरोधियों का मिलकर एक साथ चुनाव लड़ना भाजपा के लिए कितमा नुकसानदायक हो सकता है, इसकी झलक भाजपा को मिल ही चुकी है।

मोदी,सिर्फ नाम की काफी है, ऐसी बात अब नहीं रह गई। इधर कांग्रेस पहले से अधिक मजबूत होकर उभर रही है और 2019 के लिए कई दलों को अपने साथ लेने की तैयारी में लगी है। सपा,बसपा भी साथ आ चुकी है। यानी भाजपा के लिए चुनौतियां बढ़ रही है और मोदी जी की साख दांव पर लगी है।

– कुशाग्र वालुस्कर

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