यही है हर ख़ुशी-गम का साथी

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संगीत का अर्थ होता है सुव्यवस्थित की हुई ध्वनि। ऐसी ध्वनि जो कानों को अच्छी लगे, वह संगीत। गायन, वादन और नृत्य तीनों ही संगीत हैं। आज 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ ही विश्व संगीत दिवस भी है।

वैसे देखा जाए तो संगीत भी योग ही है। योग और संगीत दोनों ही हमें स्वस्थ रखते हैं। संगीत भी योग का हिस्सा ही तो है। संगीत हमें श्वास पर नियंत्रण रखना सिखाता है, जो योग का ही हिस्सा है। संगीत में वादन के दौरान हमारी अंगुलियां क्रिया में आती हैं, जिससे हमारे हाथों के जोड़ मज़बूत होते हैं। संगीत हमारे दिल और दिमाग दोनों को प्रसन्न करता है, जो हमारी सेहत को सुधारता है। नृत्य करते वक्त बनाई गई मुद्राएं योग के समान होती हैं, जो आपको स्वस्थ रखती हैं। संगीत से आपका तनाव कम होता है‌‌‌, दिमाग की नसों को आराम मिलता है, दर्द कम करने में फायदेमंद होता है,‌‌ सांस से संबंधित समस्याओं को दूर करता है ,‌‌‌ मेमोरी लॉस को कम करता है‌‌‌, नींद के लिए भी अच्छा होता है। इतने सारे फायदों के बाद हम कह सकते हैं कि संगीत एक योग ही है।

कहते हैं संगीत का जन्म तभी से हुआ है, जब से इंसान ने बोलना सीखा है परंतु बहुत समय बाद संगीत ने गीत का रूप धारण किया। इसी संगीत को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए एक दिन भी निर्धारित किया गया है। जिसे हम सब विश्व संगीत दिवस के रूप में मानते हैं। पहली बार यह आयोजन फ्रांस में किया गया था। जिसके बाद हर वर्ष यह आयोजन किया जाने लगा। फ्रांस में इसे ‘फेते दे ला म्यूसिक’ नाम से जाना जाता है। अब इन कार्यक्रमों का आयोजन अर्जेंटिना, ब्रिटेन, लक्जमबर्ग, जर्मनी, चीन, लेबनॉन, कोस्टा रिका के अलावा भारत में भी होने लगा है। संगीतकार इन कार्यक्रमों के माध्यम से पूरी दुनिया में अमन और शांति का प्रचार करना चाहते हैं।

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