इस अभिनेता ने दिया था इन्हें ‘पंचम’ नाम

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“चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना सनम…”

वर्ष 1973 में आई फिल्म ‘यादों की बारात’ के इस गीत में आज उतनी ही ताज़गी है, जितनी 70 के दशक में थी| सुरों के सरताज आरडी बर्मन ने इस गीत को अपनी धुनों से बुना था| धुनों के जादूगर आरडी बर्मन को फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से जाना जाता है| पंचम दा ने 1960 से 90 के दशक तक 331 फिल्‍मों में संगीत दिया| 27 जून 1939 को कलकत्‍ता में जन्‍मे पंचम दा को संगीत विरासत से मिला था| उनके पिता सचिन देव बर्मन भी संगीतकार ही थे|

हर किसी के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि आखिर उन्हें ‘पंचम दा’ क्यों कहा जाता है| उनके इस नाम के पीछे काफी मजेदार किस्सा है| दरअसल, आरडी बर्मन बचपन में जब भी कोई गाना गुनगुनाते थे, तो सरगम के पंचम सुर यानी ‘पा’ का इस्तेमाल अत्यधिक करते थे| यह बात जब अभिनेता अशोक कुमार के ध्यान में आई तो उन्होंने उन्हें यह नाम दिया| दरअसल, सारेगामापा में ‘पा’ का स्थान पांचवा है, इसलिए उन्होंने राहुल देव यानी आरडी बर्मन को पंचम नाम से पुकारना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे वे इस नाम से लोकप्रिय हो गए|

अपने दौर में पंचम दा ने ऐसी धुनें बनाई कि आज के युवा भी उनकी धुनों के मुरीद हैं| पंचम दा जितना अपने संगीत के लिए मशहूर थे, उतने ही अपनी आवाज़ के लिए भी| उन्होंने कई फिल्‍मों में खुद गाना भी गाया है| एक संगीतकार के तौर पर उन्‍होंने ज्‍यादातर अपनी पत्‍नी आशा भोंसले और किशोर कुमार के साथ काम किया| सलिल चौधरी को वे अपना गुरु मानते थे|

पंचम दा की लव स्टोरी

आरडी बर्मन और आशा भोंसले की पहली मुलाकात 1956 में हुई थी| गायकी के मामले में आशा फिल्म जगत में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी थीं| करीब 10 वर्ष बाद मौका आया, जब आरडी बर्मन ने फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के लिए आशा भोंसले से गाने के लिए संपर्क किया| पंचम दा और आशा भोंसले दोनों की ही पहली शादी टूट चुकी थी| पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से अलग हो गए थे| वहीं आशा भोंसले अपने पति गणपतराव भोंसले से बिल्कुल खुश नहीं थीं| इसी बीच आशा भोंसले लगातार पंचम के लिए गाने गा रही थीं| दोनों के गाने सुनकर ऐसा लगता था कि पंचम का संगीत और आशा की सुरीली आवाज एक-दूसरे के लिए ही बने हैं| संगीत ने दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ा दी थीं|

दोनों ने शादी करने का फैसला लिया, लेकिन पंचम दा की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं क्योंकि आशा की उम्र पंचम दा से काफी ज्यादा थी| जब पंचम ने अपनी मां से शादी की अनुमति मांगी तो उन्होंने गुस्से में कहा, “जब तक मैं ज़िंदा हूं, यह शादी नहीं हो सकती, तुम चाहो तो मेरी लाश पर से ही आशा भोंसले को इस घर में ला सकते हो|” शालीन स्वभाव के पंचम दा ने मां से उस समय कुछ नहीं कहा और शांतिपूर्वक वहां से चले गए| उन्हें शादी के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा| हालांकि शादी तो उन्होंने मां के जीते जी ही की, लेकिन मां की ऐसी हालत हो चुकी थी कि उन्होंने किसी को पहचानना बंद कर दिया था|

अंतिम क्षणों में अकेले रह गए

इतनी कामयाबी हासिल करने के बावजूद अंतिम क्षणों में पंचम दा अकेले रह गए थे| उनकी दोस्ती फिल्म जगत की नामचीन हस्तियों के साथ थी, लेकिन उनकी मौत के समय बस चुनिंदा दोस्त ही उनके आसपास मौजूद थे|

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