website counter widget

ये हैं हनुमानजी की अष्ट सिद्धियां और नौ निधियां

0

हनुमान चालीसा की चौपाई ‘अष्ट सिद्धि, नौ निधि (Ashta Siddhi and nav nidhi) के दाता, अस बर दीन जानकी माता’ में हनुमानजी (Hanumanji) की शक्तियों के बारे में बताया गया है कि वे अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के स्वामी थे, जो उन्हें विभिन्न देवताओं ने प्रदान की थी | यदि उनकी सच्चे मन से सेवा और पूजा-आराधना की जाए तो वे भक्तों को भी ये शक्तियां प्रदान कर सकते हैं, यह वरदान उन्हें सीता माता ने दिया था| इन अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों से हर असंभव कार्य पूर्ण किया जा सकता है| इन्हीं के बल पर हनुमानजी संकटमोचन कहलाए|   

आइये हम आपको इन अष्ट सिद्धियों, नौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों  के बारे में विस्तार से बताते हैं।

आठ सिद्धियां ( अष्ट सिद्धि )

# अणिमा :  इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।

Image result for सुरसा

इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने तब किया था, जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।

# महिमा :  इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।

Image result for विशाल हनुमानजी

जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था। इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।

# गरिमा : इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।

Related image

गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ से रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया।

# लघिमा  :  इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।

लघिमा

जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचे, तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही उन्होंने सीता माता को अपना परिचय दिया था।

# प्राप्ति :  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।

Image result for पशु-पक्षियों के साथ हनुमानजी

रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।

# प्राकाम्य : इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ ही, वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को कारण कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।

इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल के लिए प्राप्त कर लिया है।

# ईशित्व :  इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।

Related image

ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।

# वशित्व : इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।

वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।

Related image

नौ निधियां ( नव निधि )

  1. पद्म निधि :पद्मनिधि लक्षणों से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण-चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है ।
  2. महापद्म निधि : महापद्म निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिकजन को करता है ।
  3. नील निधि : नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से युक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढ़ी तक रहती है।
  4. मुकुंद निधि : मुकुंद निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है, वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।
  5. नन्द निधि :नन्द निधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणों वाला होता है, वही कुल का आधार होता है ।
  6. मकर निधि :मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करने वाला होता है ।
  7. कच्छप निधि :कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है, वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है ।
  8. शंख निधि :शंख निधि एक पीढ़ी के लिए होती है।
  9. खर्व निधि :खर्वनिधि वाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रित फल दिखाई देते हैं ।

परकाया प्रवेश

दस गौण सिद्धियां 

भगवत पुराण में भगवान कृष्ण ने इन दस गौण सिद्धियों का वर्णन किया है|

1. अनूर्मिमत्वम्
2.  दूरश्रवण
3.  दूरदर्शनम्
4.  मनोजवः
5.  कामरूपम्
6.  परकायाप्रवेशनम्
7.  स्वछन्द मृत्युः
8.  देवानां सह क्रीड़ा अनुदर्शनम्
9.  यथासंकल्पसंसिद्धिः
10. आज्ञा अप्रतिहता गतिः

Image result for भगवत पुराण में भगवान कृष्ण सिद्धियां

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Summary
Review Date
Author Rating
51star1star1star1star1star
Loading...
Share.