तंत्र के जरिये जनता को सम्मोहित करने में जुटे नेता!

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लोकतंत्र,  उम्मीदवार, चुनाव और सत्ता ये ऐसी कड़ियां हैं, जिनसे मनचाहे राष्ट्र का निर्माण होता है, लेकिन इन सभी कड़ियों को जोड़ने का काम सिर्फ जनता करती है| जनता के दरबार से ही नेताओं को सत्ता मिल सकती है| सत्ता पाने के बाद यानी चुनाव जीतने के बाद 5 साल में जनता को भुलाने की नेताओं की आदत तो भारत का इतिहास है| जैसे ही फिर चुनाव का समय आता है, नेताओं के सपने में जनता आने लगती है|

नेताओं के ऐसे स्वभाव के कारण जनता कुपित है, क्रोधित है| जनता मन में सोचती है कि आने वाले चुनाव में हम दिखा देंगे लाल टोपी वाले को, यह भावना मन से निकलकर एक कान से दूसरे कान फिर नेताओं के कानों तक पहुंचने लगती है| इसके बाद नेताओं को लगता है गए काम से इस बार| जनता के पास जाते ही उन्हें धुतकारा जा रहा है| जनता के सवालों का जवाब वे नहीं दे पा रहे हैं और कई नेता तो जनता का सामना करने से भी कतरा रहे हैं|

नेताओं के भूतकाल के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं| ऐसे में वे जनता के पास जा नहीं सकते तो सोचते हैं चलो भगवान के पास चलते हैं| जब नेताओं की पुकार सीधे-सादे भगवान भी नहीं सुनते तो नेतागण शराब पीने वाले भगवान के पास निकल पड़ते हैं| जैसे नेता शराब पिलाकर जनता को लुभाने का प्रयास करते हैं वैसे ही वे भगवान को भी मनाने का प्रयत्न करने लगते हैं| इस बात का सबूत है उज्जैन का कालभैरव मंदिर| आजकल वहां और ऐसे ही कई मंदिरों में नेताओं की भीड़ दिखना आम है|

कोई प्रत्याशी भाजपा का हो, कांग्रेस का हो या फिर किसी अन्य पार्टी का, सभी चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं, लेकिन जीत का सेहरा पहनना इतना भी आसान नहीं है| इसके लिए जब केवल जनसंपर्क से काम नहीं बन रहा तो वे सभी लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा ले रहे हैं, कई तरह के अनुष्ठान भी करवाए जा रहे हैं| विज्ञान के इस युग में आज भी नेताओं के कारण अंधविश्वास को बढ़ावा मिल रहा है| प्रत्याशियों द्वारा जीत के लिए तंत्र पूजा कराई जा रही है, तांत्रिकों द्वारा विशेष अनुष्ठान किए जा रहे है, कुछ तांत्रिक अपने घरों से ही अनुष्ठान कर रहे हैं|

इंदौर सहित प्रदेश प्रदेश की करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों को लेकर प्रत्याशी भोपाल-दिल्ली एक करने के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का सहारा भी ले रहे हैं| ये सब मालवा और निमाड़ में ज्यादा देखने को मिल रहा है| उज्जैन में भैरव के मंदिर में इस समय ज्यादातर साधना टिकट की दावेदारी और जीत के लिए ही चल रही है|

नवरात्रि से शुरू हुए अनुष्ठान

कई नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए नवरात्रि से ही अनुष्ठान शुरू करवा दिए थे| सभी विजय पाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं| प्रदेश में रोजाना 100 से ज्यादा हवन हो रहे हैं| निमाड़ से भाजपा के 9 और कांग्रेस के 7 जबकि मालवा व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के नेताओं ने नवरात्रि में नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर में उपासना की थी| आचार संहिता के कारण जहां नेतागण सीधे जनता के लिए कोई खर्च नहीं कर सकते हैं| वहीं नेता भगवान को लुभाने के लिए जमकर खर्च कर रहे हैं| पांच हजार से लेकर पांच लाख रुपए तक का खर्च करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं|

सीएम शिवराज ने भी पूजा के बाद भरा नामांकन

प्रदेश में जहां भाजपा कांग्रेस तंत्र-मंत्र की भक्ति कर भगवान को प्रसन्न कर रहे हैं| वहीं सीएम शिवराज ने भी भगवान की पूजा करने के बाद ही नामांकन फॉर्म भरा था| दरअसल, शिवराज अपने परिवार के साथ बुधनी विधानसभा सीट पर नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले नर्मदा के दर्शन करने पहुंचे थे और अपने गांव में भी पूजा अर्चना की थी|

नेताओं का यूं मंदिर जाना और तंत्र-मंत्र का सहारा लेना इस बात की ओर भी संकेत दे रहा है कि उन्हें पता है जनता उनके कर्मों के आधार पर उन्हें वोट नहीं दे सकती इसलिए वे वोट पाने के लिए भगवान की शरण में पहुंच रहे हैं और जनता को अपने वश में करने की तैयारी में जुटे हुए हैं|

-रंजीता पठारे

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