भारतीय जनता पार्टी को लगी लू

0

कहते हैं “नवतपा” चल रहा है, जिस  कारण गर्मी बहुत ज्यादा है। ऐसे समय में सावधानी बरतनी चाहिए नहीं तो लू लगने के आसार बढ़ जाते हैं। ऐहतियात के तौर पर गन्ने का रस पीना लाभदायक होता है। अब देखिए न गन्ने की उपेक्षा करने पर भाजपा को लू लग गई। गन्ने का रस पीते रहते या शर्बत ही पीते रहते तो हो सकता है लू से बच जाते।

कहते हैं कि भाजपाई सिर्फ सोडा पी रहे थे। उन्हें मिठास अच्छी नहीं लगती, चाहे गन्ने की मिठास हो या जनता के बीच भाईचारे रूपी मिठास। भाईचारे की बजाय उन्हें चारा पसंद है क्योंकि यह गाय माता का आहार है। गन्ने के बजाय डंडे पर भरोसा रखने वाले संघियों को कैराना की जनता ने गन्ने से जवाब दिया है, जो काबिले तारीफ है। एक प्रकार से जहर बोने वाले गन्ने की मिठास से हार गए।  कुछ लोग कह रहे हैं कि मतदाताओं ने गन्ने को डंडे की तरह इस्तेमाल किया है, जिसकी मार भाजपा को बहुत दर्दनाक महसूस हो रही है।

योगीजी गोरखपुर और फूलपुर का दर्द नहीं भूल पाए थे कि उनके गाल पर कैराना की जनता ने फिर तमाचा जड़ दिया, जिसकी गूंज दिल्ली दरबार तक महसूस की गई। प्रचारमंत्रीजी टूर पर हैं तो उन्हें थोड़ा कम महसूस हुआ होगा। न्यूज चैनलों पर पार्टी प्रवक्ता कह रहे थे कि योगी जी कराह रहे हैं। कटप्पा हमेशा की तरह पेट पर हाथ फेरते हुए और गंजे सिर को खुजाते हुए मंथन पर जुट गए हैं। भाजपा आईटी सेल ने हार पर अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा और प्रमाण भी प्रस्तुत किया है कि हमने झूठ और भ्रम फैलाने में कोई कोताही नहीं बरती है। जिन्ना के जिंद को कब्र से उठाकर चुनाव मैदान तक लाए, अब इससे ज्यादा क्या कर सकते हैं।

कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि भाजपा अभी-भी हिंदू-मुस्लिम राजनीति तक सीमित है और हर चुनाव में उसी को भुनाना चाहती है। वह यह भूल जाती है कि 2014 में जनादेश सिर्फ जुमलों के चलते नहीं मिला था बल्कि उसमें विकास की संभावना देखी गई थी, जो कि जुमला साबित हुई। एक बात जरूर है कि भाजपा का भरपूर विकास हुआ।  बहरहाल मध्यप्रदेश के किसान भाई हड़ताल पर हैं और मामा की मार्मिक अपील जारी है। क्षेत्रीय न्यूज चैनल बता रहे हैं कि कैसे शहरवासी सब्जी-दूध संग्रहित करें, जबकि चैनल या अखबार को इस बात पर प्रकाश डालना चाहिए कि आख़िर इस तपती धूप में किसान आंदोलन करने पर क्यों मजबूर है। आज किसानों के साथ शहरवासियों को भी खड़े होने की जरूरत है। आखिर समय के साथ किसानों की समस्या क्यों बढ़ रही हैं। गर्मी-ठंड-बरसात को खुले आसमान के नीचे खेत पर खुशी-खुशी झेलने वाला किसान आखिर आत्महत्या क्यों कर रहा है। इसका एक सबसे बड़ा कारण गांवों की उपेक्षा है। हर जरूरत के लिए ग्रामीणों को शहर की तरफ भागना पड़ता है। स्कूल-अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम गांव सिर्फ उपभोक्ता बनकर रह गए हैं। बहरहाल, एबीपी न्यूज़ चैनल पर विदिशा निवासी संजीव श्रीवास्तवजी का जबर्दस्त डांस चल रहा है, जिन्हें डब्बू अंकल के नाम से जानते हैं। ये बिल्कुल ओरिजनल है फेक नहीं है। आप भी देख सकते हैं।

-मृगेन्द्र सिंह

Share.