सुगमता दशा एवं दिशा की ओर अग्रसर भारत…

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भारत में सदियों से व्यवसाय किया जा रहा है| भारत के इतिहास को देखें तो यह सामने आता है कि विदेशी भारत में व्यापारिक उद्देश्य से आए थे। वहीं भारत ने भी दुनिया में व्यापारिक रिश्ते बनाए। व्यापार भारत का प्रमुख स्त्रोत रहा है, जो कृषि एवं निर्माण से जुड़ा है। विश्व बैंक द्वारा व्यापारिक सुगमता की दृष्टि से प्रतिवर्ष लगभग 190 देशों का अध्ययन किया जाता है और समग्र रैकिंग दी जाती है। नई रैकिंग के अनुसार, वर्ष 2018 में भारत 134वें स्थान पर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकांक्षा विश्व के 50 देशों में भारत को स्थान दिलवाए जाने की है।

नए वार्षिक विवरण के अनुसार, न्यूजीलैंड पहले स्थान पर रहा था सिंगापुर, डेनमार्क व हांगकांग का क्रमशः स्थान है। संयुक्त राज्य अमरीका का 8वां व चीन का 46वां स्थान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यावसायिक सुगमता की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय मापदंडानुसार भारत ने दौड़ तो लगाई, परंतु अभी रास्ता मध्य में है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, यदि कमी है तो नियमों, प्रक्रियाओं एवं नीतियों के क्रियान्वयन, पर्यवेक्षक एवं सुधार की है। यदि शीर्ष नेतृत्व ठान ले, प्रबल इच्छाशक्ति हो तथा राजनीतिक मंशा हो तो चुनौतियां अवसर में बदल जाएगी। इसके लिए आवश्यक है कि भारतीय जनता मजबूत एवं स्थिर सरकार का चयन करे। गठबंधन सरकारें बनती तो हैं, परंतु वैचारिक मतभेद एवं राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं बाधक बन जाती है। व्यक्ति महत्वपूर्ण हो जाता है तथा समग्रता का अभाव हो जाता है।

व्यावसायिक सुगमता की दृष्टि से दाम और मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें व्यवसाय स्थापना, निर्माण स्वीकृति, बिजली कनेक्शन प्राप्त करना, सम्पत्ति का रजिस्ट्रेशन, साख प्राप्ति, अल्पसंख्यक निवेशकों को सुरक्षा, सीमा पार व्यापार, कर भुगतान संविदा या अनुबंध क्रियान्वयन दिवालिया निपटारा आदि है। ये मापदंड नियमों, प्रक्रिया व समय अवधि व लागत से संबंधित है। इसका सीधा-संबंध नौकरशाही व लालफीताशाही से है।

गत चार वर्षों में जो सुधार हुए हैं, जिनमें भारत की रैकिंग 134 से 77 आई है। पीएम मोदी का मानना है कि राज व्यवस्था एवं नीतिगत लकवे का युग समाप्त हो गया है। साल 1991 से पूर्व राज व्यवस्था की जड़ें अत्यधिक मजबूत थीं तथा जो निर्णय में विलंबता तथा भ्रष्टाचार को पैदा करता था। व्यवसाय की निर्भरता सरकारी तंत्र पर कम से कम होनी चाहिए तथा यह व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सरकारी निर्णय एवं अनुमति की आवश्यकता कम से कम हो तथा गुड गवर्नेंस पर अत्यधिक ध्यान दिया जाए।

– कुशाग्र वालुस्कर

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