SPECIAL :  इस कारण हारे शिवराज…

0

शिवराज की हार का कारण : मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए। कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ। 15 सालों से सत्ता पर काबिज भाजपा को जनता ने नकार दिया। प्रदेश में भले ही भाजपा हारी हो, परंतु शिवराज की चमक बरकरार रही। आखिर क्या कारण रहा, जो शिवराज सरकार हार गई। प्रदेश को बीमारू राज्य से ऊपर उठाने का दावा करने वाले शिवराज आखिर कहां हार गए। भाजपा ने दावा किया था कि उन्होंने पंद्रह सालों में प्रदेश की तस्वीर बदल दी। आइए जानते हैं कि किन-किन कारणों से शिवराज को सीएम की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।

किसान

भाजपा के हारने का पहला कारण किसान रहे। भाजपा के खिलाफ किसानों का काफी आक्रोश देखने को मिला, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला। शिवराजसिंह के सीएम बनने के बाद प्रदेश में कृषि विकास दर लगातार बढ़ी। 12 वर्षों में गेहूं उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा। खाद्यान्न उत्पादन के लिए मध्यप्रदेश को सबसे बड़ा कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिला। खुद को किसान पुत्र बताने वाले शिवराज, किसानों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। मध्यप्रदेश में 2004 से 2016 के बीच 15126 किसानों ने आत्महत्या की है। फिर मंदसौर गोलीकांड के बाद किसानों का गुस्सा और बढ़ गया। शिवराज सरकार किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने का दावा करती रही, लेकिन उनका दावा खोखला साबित हुआ।

अपराध

महिला अपराधों को रोकने में भी शिवराज सरकार असफल रही। प्रदेश में बच्चों के मामा, बहनों और बेटियों को सुरक्षित माहौल देने में विफल रहे। 2017 में प्रदेश में बलात्कार के 5,310 मामले अलग-अलग थानों में दर्ज किए गए। 1 जनवरी 2018 से 30 अप्रैल 2018 तक महिलाओं और नाबालिगों के साथ 1,554 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए।

कुपोषण

शिवराज सरकार कुपोषण से लड़ने में भी खोखली रही। कुपोषण के मामले को कांग्रेस ने काफी भुनाया भी। मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के बीच करीब 57,000 बच्चों ने कुपोषण के कारण दम तोड़ दिया। 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के बीच 5 वर्ष के मृत बच्चों की संख्या 28,948 रही। वहीं 6 से 12 साल के 562 बच्चों की मृत्यु हुई।

घोटाले

शिवराज सरकार में घोटालों की लंबी लिस्ट रही। शिवराज सरकार के कार्यकाल में 156 घोटाले हुए। इनमें सबसे चर्चित व्यापमं घोटाला रहा। इसकी आग की लपेट में खुद शिवराजसिंह भी आए। इसके साथ डीमेट, सिंहस्थ, ई-टेंडरिंग घोटाला, मणिखेड़ा हरसी नहर घोटाला, ड्रिप इरिगेशन खरीदी घोटाला, भोपाल गेमल इंडिया घोटाला, शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला, मिड डे मील घोटाला, गौशाला अनुदान घोटाला, नर्मदा घाटी नहर घोटाला, डायल 100 घोटाला आदि रहे।

एससी-एक्ट एक्ट

प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट में संशोधन का लगातार विरोध हुआ, जिसका नुकसान भाजपा को हुआ। एक्ट संशोधन के बाद प्रदेश सवर्ण आंदोलन की आग में झुलसा भी। आंदोलन के दौरान पार्टियों और संगठनों ने इसी बयान को मुद्दा भी बनाया। सपाक्स इसी मुद्दे के साथ सियासी मैदान में उतरी थी। सपाक्स को चुनाव में डेढ़ लाख वोट मिले हैं, जो कहीं न कहीं शिवराज सरकार के लिए घातक साबित हुए।

 

– कुशाग्र वालुस्कर

विपक्ष में रहकर करेंगे चुनौतियों का सामना : शिवराज

मप्र की 230 सीटों के नतीजे यहां देखिए

शिवराज ने बदला स्टेटस

Share.