चुनाव परिणाम पर नज़र

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अगले आम चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव राजस्थान और तेलंगाना में मतदान के बाद संपन्न हो गए। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व मिजोरम के चुनाव पहले ही हो गए। सभी चुनावों की मतगणना 11 दिसंबर मंगलवार को होगी। राजस्थान व तेलंगाना में मतदान का आखिरी चरण पूरा होते ही विभिन्न टेलीविजन चैनलों ने अपने-अपने एग्जिट पोल के नतीजे प्रसारित करना शुरू कर दिए। इनमें बताया गया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। वहीं राजस्थान में कांग्रेस को बहुमत मिल सकता है। तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति के सत्ता में बने रहने के आसार हैं, जबकि मिजोरम में कांग्रेस के हारने की संभावना है।

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अभी भाजपा की सरकार है। ये तीनों ही राज्य भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन तीनों प्रमुख राज्यों में एग्जिट पोल से मिल रहे संकेतों ने राजनीतिक धड़कनें बढ़ा दी हैं, परंतु पिछला अनुभव यह रहा है कि एग्जिट पोल असल नतीजों के पहले चर्चा का विषय ज़रूर बन जाती है। बहरहाल, देश की नज़र अब मतगणना पर है और इसके लिए अब 11 दिसंबर का इंतज़ार है।

पांचों राज्यों के ये चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव भी ज्यादा दूर नहीं हैं। चुनाव प्रचार के दौरान कई तरह की बहसों-विवादों के बीच परस्पर आरोप-प्रत्यारोप का खूब दौर चला। भाजपा शासित महत्वपूर्ण तीन राज्यों में तो धर्म जाति के मुद्दों को जमकर उछाला गया। मध्यप्रदेश में ईवीएम को अपने गंतव्य तक निर्धारित समय से 48 घंटे विलंब से पहुंचाने के विवाद ने तूल पकड़ लिया। इसके साथ ही पांचों राज्यों में ईवीएम खराबी की खूब शिकायतें आईं। ईवीएम की खराबी के कारण मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं।

लोकतांत्रिक प्रणाली के आधारभूत स्तंभ चुनाव आयोग पर देश को भरोसा है, परंतु ईवीएम को लेकर सवाल जब बार-बार खड़े होते हैं तो लोगों का भरोसा टूटता है। ईवीएम का मुद्दा अब भी एक चुनौती बना हुआ है और आयोग को इसका स्थायी हल निकालना चाहिए। फिलहाल पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने में चंद घंटों का इंतज़ार है। 11 दिसंबर मंगलवार के नतीजों के बाद इन राज्यों और देश की सियासत को एक नई दिशा मिलेगी। देखने को मिलेगा कि हवा किस तरफ जा रही है। लंबे समय से वनवास काट रही कांग्रेस के लिए बड़ा अवसर है, तो भाजपा को अपनी साख बनाए रखने के लिए बड़ी चुनौती है। फाइनल नतीजों के बाद लोकसभा की तस्वीर समझने में आसानी होगी। इन चुनावों से राजनीतिक दलों का भविष्य टिका हुआ है।

 

– कुशाग्र वालुस्कर

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