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दिलवालों की नहीं लाशों की दिल्ली…

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भारत में ये कैसा समय आ पड़ा है

देश के दिल में देखो, प्रदूषण का दौरा पड़ा हैं

 

राजनीती का असर दिल्ली की फिज़ाओ पर हो रहा हैं

तभी तो इंसान के साथ साथ सब कुछ जहरीला हो रहा हैं

 

हवा जहरीली ,पानी दूषित कैसे हो गुजारा

सरकार को मतलब नहीं,आदमी फिर रहा मारा-मारा

 

घुट रहा हैं दम,फेफड़े सड़ रहे हैं

कुछ नहीं करते नेता बस मुजोरी की जंग लड़ रहे हैं

 

 कोई साइकिल से आने का नाटक करता हैं

कोई इलेक्ट्रिक कार खरीदने की नौटंकी दिखाता हैं

पर जाकर देखो तुम सड़को पर, जहरीली हवा से बस आम आदमी मरता नज़र आता  हैं

 

आप बके गाली, गंभीर खाये जलेबी

जनता से मतलब नहीं कोई, झाड़ू,कमल सब फरेबी

 

बेहद घूम लिया विदेश मोदी जी, अब थोड़ा घर भी घूम लो 

कैसे मरमर कर जीते हैं हम इस प्रदूषण में, कभी ये भी जान लो

 

महंगाई के दौर में स्वच्छ हवा के भी दाम लग गए

अरे पैसो के खातिर तुम नेता कितना गिर गए

 

अब भी ना जागे तो कोहराम मच जायेगा

ज़हरीली हवा से मरेगी जनता, तो क्या नेता बच जायेगा

 

अरे बचालो आज दिल्ली को वरना

कल दिल्ली श्मशान बन जायेगा और

दिल्ली की सड़को पर लाशों का ढेर नज़र आएगा |

Vishvambhar Nath Tiwari ( Creative Editor)

हुस्न का जाल – देश बेहाल


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