देश की एकता के सूत्रधार थे लौहपुरुष!

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आज से 143 साल पहले देश को एक ऐसे महान क्रांतिकारी मिले थे, जिन्होंने एकता की नई मिसाल कायम की| आज ही के दिन देश के पहले गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था| भारतीय राजनीति के इहिहास में सरदार पटेल के योगदान को कभी नहीं  भुलाया जा सकता है| सरदार पटेल का जन्म वर्ष 1875 में गुजरात के नड़ियाद में एक किसान परिवार में हुआ था| वे झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी की चौथी संतान थे| सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई  उनके भाई थे| उनका विवाह झबेर बा से हुआ|

करमसद से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद वे बैरिस्टरी की पढ़ाई करने लंदन चले गए। वहां से वर्ष  1913 में भारत लौटे और फिर अहमदाबाद में वकालत शुरू कर दी| पटेल महात्मा गांधी के विचारों से बेहद प्रभावित थे इसलिए उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया| आज़ाद भारत के वे पहले गृहमंत्री व उपप्रधानमंत्री बने| भारतीय राजनीतिक इतिहास में उन्हें एक गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है| उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पी भी कहा जाता है|

उनके कठोर व्यक्तित्व में संगठन कुशलता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा थी| उनकी ख्याति और भी इसलिए बढ़ गई क्योंकि उन्होंने भारत के रजवाड़ों को शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में शामिल कर लिया था| सरदार पटेल ने भारतीय संघ में उन रियासतों का विलय किया, जो स्वयं में संप्रभुता प्राप्त थीं| उनका अलग झंडा और अलग शासक था, लेकिन सरदार पटेल का मानना था कि देश आज़ाद हो चुका है और जनता किसी के अधीन नहीं रहेगी|

उन्होंने आज़ादी के पहले ही पीवी मेनन  के साथ मिलकर कई राज्यों को भारत में मिलाने का कार्य शुरू कर दिया था| उन्होंने देश के राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना संभव नहीं होगा| इसके बाद तीन रियासतें हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ को छोड़कर शेष सभी रजवाड़ों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया|

जब हैदराबाद के निज़ाम ने विलय का प्रस्ताव नहीं माना तो पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम से आत्मसमर्पण करवा लिया| सरदार पटेल द्वारा 562 रियासतों का एकीकरण करवाना विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था|  भारत की यह रक्तहीन क्रांति थी| महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को इन रियासतों के बारे में लिखा था, “रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी, जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।” इसी कारण उन्हें लौहपुरुष कहा जाता है|

सरदार पटेल का निधन  15 दिसंबर, 1950 को मुंबई में हुआ था| उन्हें वर्ष 1991 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से नवाज़ा गया| वर्ष 2014 में केंद्र की मोदी सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है| आज उनकी जयंती पर उनकी 182 मीटर ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उद्घाटन किया जा रहा है|

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा

गुजरात के वड़ोदरा में नर्मदा नदी  के किनारे बनी सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बन गई है| इसका वजन 1700 टन और ऊंचाई 522 फीट है| इसके पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फीट और चेहरे की ऊंचाई 70 फीट है| इसके पहले चीन की स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के नाम दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था| सरदार पटेल की प्रतिमा  93 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुनी है| इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की  138वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे|

इस प्रतिमा को लगभग 7 किमी की दूरी से देखा जा सकता है| लौहपुरुष की प्रतिमा में पर्यटक लिफ्ट के द्वारा प्रतिमा के ह्रदय भाग तक जा सकेंगे| यह एक भूकंपरोधी प्रतिमा है, वहीं 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा भी इसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती है| इसके साथ ही इसे ज़ंग रोधी भी बनाया गया है| सिंधु सभ्यता की तर्ज पर 85 प्रतिशत तांबे के साथ चार अन्य धातुएं भी मिश्रित की गई हैं| इस प्रतिमा के लिए कई किसानों से लोहा मांगा गया|  6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना के लिए लोहा दान किया गया|  इस प्रतिमा के अंदर 135 मीटर की ऊंचाई पर एक दर्शक दीर्घा बनाई गई है, जिससे करीब 200 पर्यटक सरदार सरोवर बांध, इसके जलाशय और सतपुड़ा व विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का दीदार कर सकें| आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रतिमा को देश को समर्पित कर दिया|

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