आंदोलन की नहीं बिचौलियों को हटाने की जरूरत

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किसान भाइयों,

आप किनके बहकावे में आकर शहर से अपना रिश्ता 10 दिनों के लिए तोड़ रहे हो ? आपसे यह देश चलता है और आप किसी और के कहने में…आप अपनी फसल और सब्जी-भाजी शहरों में नहीं लाएंगे, दूध नहीं भेजेंगे शहर के बच्चों के लिए, पर इसका फायदा किसको मिलेगा पता है आपको ?

शहर के लोग तो यों ही पिज्जा-बर्गर और न जाने किस-किस से अपना पेट भर लेते हैं… शहर में सब्जी न भेजने का फायदा उठाएंगे बिचौलिये…आज तक जो भी उपज आप मंडी में भेजते हैं, उसका फायदा ये बिचौलिये और व्यापारी उठाते हैं …आपकी तो लागत भी नहीं निकल पाती है…कल तक बाज़ार और सब्जी मंडी में भारी खरीदारी हुई…लोगों ने 10 दिन की सब्जी खरीद ली…जिस भाव में मिली खरीद ली…

आपको क्या मिला वही पुराना भाव…मंडी में जिन बिचौलियों और दलालों ने आपका माल बिकवाया उन्होंने कमाया क्योंकि मंडी में माल की आवक भी बहुत थी…फिर कमाया उन्होंने जो आपका माल खरीदकर खुदरा व्यापारियों या ठेलेवालों को बेचते हैं…आपकी 100 रुपए की पोटली उन्होंने 150 में खुदरा व्यापारियों या ठेलेवालों को बेची…अब ठेलेवालों और खुदरा व्यापारियों ने आपका माल 200 से 250 रूपए तक बेचा…हम आम लोगों की जेब से तो 250 रुपए निकले, पर आपको मिले 100 रुपए… अब आगे क्या ? आपकी 10 दिन की सब्जी-भाजी या तो ख़राब होगी या आप उनको अपने पशुओं को खिलाएंगे…या फिर खेत में ही खराब होने के लिए छोड़ देंगे …यहां भी नुकसान आपका ही हुआ ना…

अब बात करें 10 दिन बाद की ..आप फिर एक साथ काफी मात्रा में अपनी फसल बेचने मंडी में लाएंगे…फिर औने-पौने दाम में आपको अपना माल बेचना होगा क्योंकि मांग से अधिक आपूर्ति होने से आपका माल कम कीमत ही दे पाएगा…फिर बिचौलिये और दलाल कमाएंगे… बाद में वे ही खुदरा व्यापारी और ठेले-रेहड़ी वाले आपके माल को 2 गुना 3 गुना भाव में बेचकर भारी मुनाफा कमाएंगे..आप रहे वहीं के वहीं …आपने क्या पाया..यह आप भी तो सोचो भाइयों ..

क्यों आप इस तरह के राजनीतिक आंदोलनों के पचड़े में पड़ते हैं| ये सारे राजनीतिक दल अपनी-अपनी रोटी आपकी आंच में पकाकर खाते हैं…चाहे ये सत्ताधारी दल हो या विरोधी दल, ये आपके लिए नहीं अपने लिए आपको आंदोलित करते हैं…आपके आंदोलन की आड़ में ये हिंसा और लूटपाट पर भी आमादा हो जाते हैं और नाम आपका आता है…किसान आंदोलन में यह हुआ, वह हुआ, किसान हिंसक हो गए…

किसानों ने आग लगा दी…किसानों ने लूटपाट की…याद करो पिछले वर्ष का वह मंजर, जब मंदसौर में किसान आंदोलन में गोली चली और मारा गया आपका हमारा ही भाई…विरोधी दल ने आपको सहानुभूति का मरहम लगाया और सरकार ने जांच आयोग बैठाकर अपनी औपचारिकता पूर्ण की…बस स्थिति वहीं की वहीं ..सोचो दोस्तों, आप क्या कर रहे हैं ? किनके साथ हैं…क्यों कर रहे हैं…इसका नतीजा क्या होगा..?

आप इस बार सोचो, क्या आप सही लोगों के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे हैं… आप अपना नेतृत्व खुद खड़ा करें…बिचौलियों को हटाओ और खुद अपना संगठन खड़ा कर अपनी फसल का उचित दाम जनता से प्राप्त करो…करो कुछ ऐसा कि आमजन भी आपके साथ हों और आप को भी आमजन का फायदा मिले…निर्णय आपके हाथ है, आप अब क्या करते हैं यह आप ही निश्चय करें…

                 -डॉ.कमल हेतावल

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