अब तुगलक लेन से चलेगी प्रदेश कांग्रेस

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मध्यप्रदेश में चुनावी बिगुल बजने से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बड़ी चुनावी बिसात मध्यप्रदेश में बैठा दी है| कांग्रेस में बिगड़ते हालात के बीच राहुल ने आपसी सामंजस्य बैठाने की कोशिश की है और यह कोशिश कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चेहरे के साथ ही नज़र आने लगी है| कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव समिति का प्रभारी बनाकर राहुल गांधी ने अपने सबसे विश्वस्त लोगों को प्रदेश सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए छोड़ दिया है|

इस फैसले को कांग्रेस अध्यक्ष के सबसे बड़े फैसले के रूप में इसलिए भी माना जा सकता है कि प्रदेश में कांग्रेस को उबारने के लिए इस तरह के समीकरण की जरूरत थी| वरिष्ठ नेता दिग्विजयसिंह कमलनाथ को अपना समर्थन पहले ही दे चुके थे| वहीं कमलनाथ ने सिंधिया के साथ मिलकर प्रदेश में चुनाव लड़ने की हामी भर दी थी| कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी के इस फैसले से सबके मन की हो गई| अब कमलनाथ गुट और सिंधिया गुट दोनों मिलकर चुनाव में अपनी ताकत झोंक सकते हैं क्योंकि दोनों के पद भले ही अलग-अलग हों, लेकिन जिम्मेदारी है चुनाव जीतना|

दूसरी ओर पहली बार कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष का पद भी निर्धारित किया गया और प्रदेश के 4 बड़े चेहरों को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया| इसमें जीतू पटवारी और बाला बच्चन राहुल गांधी के भी ख़ास हैं| वहीं पटवारी, सिंधिया और दिग्विजयसिंह दोनों के चहेते भी हैं| इसके अलावा रामनिवास रावत को सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है| सुरेन्द्र चौधरी कमलनाथ के विश्वस्त हैं| ये चारों नेता अपने क्षेत्र के अलावा भी प्रदेश की कई विधानसभाओं में पैठ रखते हैं, इस कारण भी इन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फैसला राहुल गांधी का एक सूझबूझ भरा कदम है| यानि यदि कमलनाथ दिल्ली में व्यस्तताओं के बीच भी प्रदेश कांग्रेस के लिए कोई आदेश निकालते हैं तो ये चारों नेता उसे अमल करवाने का दम रखते हैं|

लेकिन दूसरी तरफ राहुल गांधी की समझदारी कहीं न कहीं कांग्रेस के लिए परेशानी भी बन सकती है| प्रदेश के कई नेता ऐसे हैं, जो पटवारी या बाला बच्चन से वरिष्ठ हैं और इनसे उनकी पटरी नहीं बैठती है| ऐसे में उन नेताओं के विरोध को चुनाव के दौरान दबाना भी कमलनाथ के लिए बड़ी चुनौती होगी|

इधर अरुण यादव को हटाए जाने के बाद कांग्रेस भले ही कहे कि उनका कार्य सराहनीय रहा है, लेकिन सभी जानते हैं कि उनकी निष्क्रियता के कारण ही उनकी छुट्टी हुई है| ऐसे में कांग्रेस का यादव गुट अगले चुनाव में कमलनाथ की नई टीम के लिए दिक्कतें पैदा कर सकता है|

कुल मिलाकर अब तक के राजनीतिक समीकरण के अनुसार, अब दिल्ली के तुगलक रोड से प्रदेश की राजनीति चलेगी| राहुल की सोच के साथ कमलनाथ का आदेश चलेगा| प्रदेश की टीम उसे जमीन पर उतारेगी और अगर राहुल की गोट सही निकलती है तो मध्यप्रदेश की जीत के बाद राहुल कांग्रेस के हीरो बनकर उभर सकते हैं|

-राजनीतिक डेस्क

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