रमन का विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान

0

भारत एक ऐसा देश है, जिसके पास एक से बढ़कर एक ऐसी जानकारी उपलब्ध है, जिसके बारे में अभी कई देश खोज कर रहे हैं| हमारे प्राचीन ग्रंथों से सभी विषयों की जानकारी मिल जाती है| दशमलव प्रणाली की खोज, शून्य का आविष्कार, पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की खोज और भी कई ऐसे आविष्कार, जिनका भारत में प्राचीनकाल में ही पता चल गया था| भारत के पास ज्ञान का खजाना होते हुए भी किसी ने विज्ञान के क्षेत्र में कोई ख़ास प्रयोग नहीं किए थे, लेकिन भारत की भूमि पर जन्मे वैज्ञानिक सीवी रमन विज्ञान के ऐसे महान वैज्ञानिक बने, जिन्होंने पुरानी सारी परंपराओं को तोड़ दिया|

महान वैज्ञानिक की पुण्यतिथि

डॉ.सीवी रमन ने भारत को वैज्ञानिक नज़रिये से मज़बूत बनाने में अपना अतुलनीय योगदान दिया| वे देश के पहले विज्ञान क्षेत्र के वैज्ञानिक थे, जिन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया| क्या आप जानते हैं कि ये महान वैज्ञानिक पहले एक सरकारी कर्मचारी थे| जब उन्हें नौकरी से शांति नहीं मिली तो जीवन में कुछ ख़ास करने के ज़ज्बे के साथ उन्होंने विज्ञान की राह चुनी| आज देशवासी उनके वैज्ञानिक शोध और युवाओं में विज्ञान के प्रति लगाव पैदा करने के लिए उन्हें याद करते हैं|

बचपन में ही रचा कीर्तिमान

चन्द्रशेखर वेंकटरमन यानी सीवी रमन का जन्म 7 नवंबर को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्‍ली में हुआ था| पिता चन्द्रशेखर अय्यर एसपीजी कॉलेज में भौतिकी के प्रोफ़ेसर थे और मां पार्वती अम्मल थीं| सीवी रमन ने 11 साल की उम्र में ही मैट्रिक पास कर ली थी और उन्होंने 13 वर्ष की आयु में एफए परीक्षा स्कॉलरशिप प्राप्त कर ली थी| वर्ष 1906 में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें वित्त विभाग के जनरल अकाउंटेंट के पद पर नौकरी मिल गई| वे ऐसे पहले भारतीय थे, जिन्हें इतना ऊंचा सरकारी पद मिला था| वे सरकारी नौकरी के साथ शादीशुदा ज़िंदगी जी रहे थे, लेकिन उन्हें इस काम से शांति नहीं मिल रही थी|

जब एक बार रमन ऑफिस से लौट रहे थे तो उन्होंने एक साइन बोर्ड देखा, जिस पर लिखा था ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’ यह देखते ही वे परिषद् कार्यालय पहुंचे और वहां प्रयोग करने की आज्ञा ले ली| इसके कुछ समय बाद उनका रंगून और उसके बाद नागपुर में ट्रांसफर हो गया| उन्होंने अब अपने लिए घर में ही प्रयोगशाला बना ली| इसके बाद फिर उनका ट्रांसफर कलकत्ता में हुआ और उन्हें फिर मौक़ा मिला प्रयोग करने का| उनके विज्ञान में योगदान के लिए उन्हें 1930 में भौतिक शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया| उन्होंने भारत को विश्वस्तर पर पर सम्मान दिलाया|

भारत रत्न और लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित

नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भारत सरकार की ओर से सीवी रमन को वर्ष 1954 में भारतरत्न की उपाधि दी गई| इसके बाद वर्ष 1957 में उन्हें लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया|

उपराष्ट्रपति बनने का मौक़ा

सीवी रमन देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे, लेकिन उन्हें कभी भी सत्ता का लोभ नहीं रहा| जब वर्ष 1952 में उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव दिया गया, तब उस समय सभी राजनीतिक दलों ने भी साथ होकर इस पर सहमति दे दी थी, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया| वे केवल विज्ञान के क्षेत्र में ही अपना योगदान देना चाहते थे| युवाओं के मन में विज्ञान के प्रति ललक जगाने वाले एक महान वैज्ञानिक ने 21 नवंबर 1970 को इस दुनिया को अलविदा कर दिया| आज भी उनके नाम से कई संस्था भारत में चलाए जा रहे हैं जो उनकी यादों को ताजा करते हैं|

Share.