आवाज़ की कशिश व एक्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता

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“काश कि तुमने हमें आवाज़ दी होती तो हम मौत की नींद से भी उठकर चले आते।” इस तरह के अपने अंदाज़ से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले अभिनेता राजकुमार एक बेमिसाल इंसान थे। ‘जानी’ कहते ही उनकी छवि सामने आ जाती है, जो अपनी आवाज की कशिश और एक्टिंग से पहचाने जाने जाते थे। अपने तकिया कलाम ‘जानी’ से दशकों तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में राज करने वाले एक्टर राजकुमार का आज जन्मदिन है। आज वे हमारे बीच मौजूद नहीं है, लेकिन उनके संवाद और उन पर फिल्माए गानों के माध्यम से वे सभी उनके चाहने वालों के दिलों में ज़िंदा हैं। वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी एक्टिंग और आवाज के लोग आज भी कायल हैं। राजकुमार ने लगभग 60 फिल्मों में एक से बढ़कर एक रोल अदा किए।

राजकुमार की पहली फिल्म 1952 में आई थी ‘रंगीली’, उसके बाद उन्होंने ‘मदर इंडिया’, ‘आबशार’, ‘घमंड’, ‘नौशेरवां-ए-आदिल’, ‘बेताज़ बादशाह’, ‘लाखों में एक’, ‘राजतिलक’ जैसी करीब 200 फिल्मों में काम किया। साल 2000 में आई ‘शब्दबेधी’ उनकी आखिरी फिल्म थी। 8 अक्टूबर 1926 को बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में जन्मे राजकुमार कश्मीरी पंडित थे। गले में कैंसर की बीमारी से जूझने के बाद राजकुमार ने 69 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

राजकुमार का असली नाम कुलभूषण पंडित था और उनको प्यार से करीबी लोग ‘जानी’ के नाम से पुकारते थे। फिल्मों में आने से पहले राजकुमार पुलिस में नौकरी करते थे। 1940 में मुंबई आने के बाद वे यहां सब इंस्पेक्टर के रूप में काम करने लगे। अपने दमदार अभिनय के बलबूते बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके राजकुमार को एक फ्लाइट अटेंडेंट से इश्क हो गया। राजकुमार की मुलाकात जेनिफर से हुई, जो एक फ्लाइट अटेंडेंट थी। आगे चलकर इन दोनों ने शादी रचा ली और जेनिफर ने अपना नाम बदल कर  ‘गायत्री’ रख लिया।  राजकुमार ने 1967 में ‘हमराज’ और 1968 में ‘नीलकमल’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में किरदार निभाया। ये फिल्में अपने दौर की सुपरहिट फिल्में रही हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि फिल्मों में अभिनय करने वाले इस अभिनेता को फिल्में देखने का बिलकुल शौक नहीं था। एक्टर बनने के बाद भी राजकुमार को फिल्में देखने की कोई लालसा नहीं हुई। एक इंटरव्यू में राजकुमार ने कहा था, “मेरी फिल्में एक वक्त पर बिल्कुल नहीं चलती थी, लेकिन फीस 1 लाख बढ़ जाती थी और मैंने अपने सेक्रेटरी से कहा कि पिक्चर चले न चले, लेकिन मैं फेल नहीं हो रहा हूं।” गले के कैंसर की वजह से 3 जुलाई 1996 को राजकुमार ने इस दुनिया से विदा ले ली। उनके द्वारा बोले गए सभी डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर ही रहते हैं।

फिल्म सौदागर में कहा उनका डायलॉग “जानी…हम तुम्हें मारेंगे और ज़रूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी और वह वक्त भी हमारा होगा।” आज भी वही असर रखता है जो उस समय में था। फिल्म ‘मरते दम तक’ का फेमस डायलॉग “जिंदगी एक नाटक ही तो है, लेकिन जिंदगी और नाटक में फर्क है, नाटक को जहां चाहो, जब चाहो बदल दो, लेकिन जिदंगी के नाटक की डोर तो ऊपर वाले के हाथ होती है।” उन्हें याद करने पर मजबूर करता है।

फिल्म वक़्त का “जानी, ये चाकू है, बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ कट जाए तो खून निकल आता है।” ये डायलॉग तो आज भी गली-मोहल्ले में आसानी से सुना जा सकता है।

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