जानिए अगस्त क्रांति से जुड़ी ख़ास बातें…

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आज यानी 9 अगस्त 1942 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था| आज भारत छोड़ो आंदोलन की 76वीं सालगिरह है| द्वितीय विश्वयुद्ध में समर्थन लेने के बावज़ूद जब अंग्रेज़ भारत को स्वतंत्र करने के लिए तैयार नहीं हुए तो राष्ट्रपिता ने आज़ादी की अंतिम जंग का ऐलान करते हुए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का आगाज़ किया था| यह आंदोलन मुंबई के जिस पार्क से शुरू हुआ था, उसे अगस्त क्रांति मैदान के रूप में जाना जाता है| आज के दिन को अगस्त क्रांति या भारत छोड़ो आंदोलन और भारतीय क्रांति दिवस के रूप में भी मनाया जाता है|

दरअसल, अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए 4 जुलाई  सन् 1942 ई. को एक प्रस्ताव पारित किया गया था| उस प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अंग्रेज़ भारत नहीं छोड़ते हैं तो उनके ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाया जाए| इसके बाद ही ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत हुई|

9th June 1939: Indian thinker, statesman and nationalist leader Mahatma Gandhi (Mohandas Karamchand Gandhi, 1869 – 1948), centre, waiting for a car outside Bifla House, Bombay, on his return from Rajkoy. Amongst the group with him are Pandit Nehru (1869 – 1964) (left) and Vallabhai Patel (right). (Photo by Keystone/Getty Images)

राष्ट्रपिता के एक नारे को सुन ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में देश की लगभग 20 फीसदी जनता शामिल हो गई| इस आंदोलन के दौरान ही अंग्रेजों ने 50 हजार से ज्यादा लोगों को मार डाला था| ‘भारत छोड़ो’ नारे की रचना युसुफ मेहर अली ने की थी|

इस आंदोलन की शुरुआत में कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं के बीच मतभेद शुरू हो गया था| कई लोगों को लगता था कि बापू का यह आंदोलन अंग्रेजों को भगाने के लिए कारगर साबित नहीं होगा| इसके बाद प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने पार्टी को अलविदा कह दिया| पंडित जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भी इस आंदोलन में अपना समर्थन देने से कतरा रहे थे, लेकिन उन्होंने बापू के आह्वान पर आंदोलन के अंत तक अपना समर्थन दिया| साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अशोक मेहता  और जयप्रकाश नारायण ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया|

आंदोलन शुरू होने के बाद गांधीजी को अंग्रेजों ने पुणे  के आग़ा ख़ान पैलेस में क़ैद कर दिया| इसके बाद कांग्रेस के लगभग सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन युवा नेत्री अरुणा आसफ अली अंग्रेजों के चंगुल में नहीं फंसी| अरुणा आसफ अली ने मुम्बई  के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर आंदोलन फिर शुरू किया| गांधीजी के इस आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा हुई, कई लोग मारे गए| गांधीजी ने जेल में ही अपना आंदोलन जारी रखा| उन्होंने 21 दिन की भूख हड़ताल की, जिसके बाद उनका स्वास्थ्य अत्यधिक बिगड़ गया| इसके बाद जब अंग्रेजों ने परिस्थिति पर काबू पा लिया तो वर्ष 1944 में बापू को रिहा कर दिया| जेल से निकलने के बाद महात्मा गांधी को विरोधियों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा क्योंकि इस आंदोलन के कारण लाखों लोग मारे जा चुके थे|

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