दीपावली की खुशियों में घुलता सांप का ज़हर…!!!

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दीपावली का त्यौहार यानी खुशियों का आगमन| दीपों की लड़ियां, पकवानों की मिठास और परिवार का साथ इस त्यौहार में चार चांद लगा देते हैं| एक त्यौहार के लिए हम न जाने कितने ही दिनों पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं, घर की सफाई, पकवानों की लिस्ट, नए कपड़े और न जाने क्या क्या? हम यह त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ख़ुशी के त्यौहार पर हमारे द्वारा किए गए कार्य ही हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डाल देते हैं| पिछले कुछ सालों से दीपावली का ट्रेंड बदलते जा रहा है| पहले जहां बच्चे मिठाइयों की लिस्ट बनाते थे कि उन्हें इस बार कौन-कौन से पकवान खाने हैं वहीं अब पटाखों की लिस्ट बनाई जाती है कि दीपावली वाले दिन कौन-कौन से पटाखे जलाने हैं|

दीपावली व आतिशबाजी का गहरा नाता है| पहले जहां लक्ष्मी पूजन के बाद शगुन के रूप में पटाखे जलाए जाते थे वहीं अब कई लोग दूसरों से प्रतिस्पर्धा से भी पटाखे छोड़ते हैं| पटाखों की धमक हमारे चेहरे पर जरूर मुस्कान लाती है, पर यह मुस्कान हमारी बर्बादी का पूर्वाभ्यास होती है| इसका आभास हमें उस वक्त नहीं होता, जब हम पटाखों की रोशनी में खो जाते हैं, लेकिन बाद में यह काल बनकर हमारे सामने आती है| क्या आप जानते हैं कि इससे आपके शरीर और पर्यावरण को कितना नुकसान होता है? शायद आप असलियत जानेंगे तो भले ही आप कितने ही पटाखे प्रेमी या हिंदुत्व प्रेमी हो, लेकिन पटाखे जलाने से पहले एक बार ज़रूर सोचेंगे|

सांप की एक गोली की डिब्बी 464 सिगरेट के बराबर खतरनाक

यह जानकर आप चौंक जाएंगे, लेकिन यह सच है| सभी पटाखों में सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं एक छोटी सी डिबिया में आने वाली काली-काली सांप की गोलियां| ‘इंडिया स्पेंड’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सांप की एक गोली की डिब्बी से निकला जहरीला धुआं 464 सिगरेट के बराबर नुकसान पहुंचाता है| ये गोलियां ज्यादातर बच्चों द्वारा जलाई जाती है| वहीं सांप की गोली के अलावा 1000 पटाखों वाली लड़, फुलझड़ी, अनार और चकरी का भी हमारे शरीर पर घातक प्रभाव पड़ता है| पुणे की ‘चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन और इंटरडिसिप्लिनरी स्कूल ऑफ हेल्थ साइंस’  ने बताया कि 1000 पटाखों वाली लड़ 277 सिगरेट के बराबर जहरीला धुआं उगलती है| इतना ही नहीं एक फुलझड़ी से 74 सिगरेट, चकरी से 68 सिगरेट और अनार से 34 सिगरेट के बराबर धुआं निकलता है|

मनोरंजन के लिए स्वास्थ्य पर प्रहार

आजकल लोग पटाखे खरीदते समय उसकी तीखे शोर व प्रकाश पर ध्यान देते हैं| पटाखे के रूप में हम पैसों की बर्बादी व जान को जोखिम  में डालने का पूरा-पूरा सामान खुशी-खुशी घर लाते हैं| हर साल पटाखों के कारण कई बच्चे और बड़े जख्मी हो जाते हैं, लेकिन फिर अगले साल वही शुरू हो जाता है| जब पटाखे जलते व फूटते हैं तो उससे वायु में सल्फर डाइआक्साइड व नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि गैसों की मात्रा बढ़ जाती है| ये हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह होती हैं|

पटाखे का धुआं कितना नुकसानदायक होता है, इसका अंदाजा बस इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल दीपावली की रात दो दर्जन से ज्यादा लोगों को सांस की तकलीफ के कारण अस्पतालों में रैफर किया गया था| इनमें से तीन लोगों की मौत भी हो गई थी| पटाखों की धुंध यानी स्मॉग से सांस फूलने, घबराहट, खांसी, हृदय और फेफड़े संबंधी दिक्कतें, आंखों में संक्रमण, दमा का अटैक, गले में संक्रमण जैसी समस्याएं होती है |

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों को लेकर सुनाया अहम फैसला

पटाखों से प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे मानव जीवन संकट में आ रहा है| इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर को एक अहम फैसला सुनाया, जो शायद ज़रूरी भी था| कोर्ट ने त्यौहार की खुशियों, लोगों की भावनाओं और उनकी रुचि को ध्यान में रखते हुए पटाखों पर पूर्णत: प्रतिबंध नहीं लगाया है बल्कि इसके लिए एक समय निश्चित किया है| कोर्ट के आदेशानुसार, दीपावली पर रात  आठ बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जला सकते हैं, क्रिसमस और न्यू ईयर पर सिर्फ 20 मिनट ही पटाखे फोड़ सकते हैं| 11. 55 बजे रात से 12.00 बजे रात तक ही पटाखे जला सकते हैं|

पटाखों को मत कहना ‘वन्स मोर’

कोर्ट का फैसला आते ही कई लोग हिन्दूवादी हो गए, सवाल उठने लगे कि क्यों हिन्दुओं के त्योहारों पर ही रोक लगाई जाती है| यदि आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो यह गलत है| वैसे दीपावली की खुशियां पटाखे जलाकर ही मिलेगी तो इसके लिए भी आपके पास अब विकल्प मौजूद हैं| आजकल बाज़ार में ईको-फ्रेंडली पटाखे आए हैं, जिससे आपका पटाखे जलाने का शौक भी पूरा हो जाएगा और वो भी वायुमंडल को नुकसान पहुंचाए बगैर| इस दीपावली कुछ नया करें और दूसरों को भी बताएं कि पटाखे वाकई कितने हानिकारक हैं| दीप जलाकर और मिठाइयां बांटकर मनाएं त्यौहार|

-रंजीता पठारे

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