प्रधानमंत्री कम, प्रचारमंत्री ज्यादा

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी लंदन-यात्रा के दौरान फिर यह सिद्ध किया है कि वे भारत के प्रधानमंत्री कम और प्रचारमंत्री ज्यादा हैं। सैकड़ों प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति में उन्होंने जबर्दस्त नौटंकी रचाई। लगभग 2 घंटे तक चले प्रश्नोत्तरों में उन्होंने कई चौके और छक्के लगाए। बार-बार तालियों से हॉल गूंजता रहा। कई सवालों पर उनकी हाजिर जवाबी कमाल की थी। वैसे इस तरह की नौटंकियां जब खेली जाती हैं तो उनका पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) पहले से ही कर लिया जाता है।

सवाल पूछनेवाले को जवाब का पता पहले से होता है और जवाब देने वाले को सवाल पहले से पता होते हैं। फिर भी मोदी कुछ मुद्दों पर फिसल गए। शायद इसका कारण प्रचार पाने की अदम्य लालसा रही हो। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कैसे की ? जो बात उन्होंने भारतीय नागरिकों और भारतीय संसद को भी अभी तक नहीं बताई, वह उन्होंने लंदन में उजागर कर दी।

उन्होंने कहा कि 2016 में पाकिस्तान में घुसकर उन्होंने जो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करवाई, उसकी सूचना उन्होंने पाकिस्तानी जनरलों को सुबह 11 बजे देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने डर के मारे फोन नहीं उठाया। 12 बजे उनको और अपने मीडिया को उन्होंने एक साथ खबर की। विदेशों में रहने वाले भारतीयों को पूरी सच्चाई का पता ही नहीं । उन्होंने तालियां पीट दीं। उन्हें क्या पता कि यह सर्जिकल स्ट्राइक, वास्तव में फर्जीकल स्ट्राइक थी ! किसी सर्जिकल स्ट्राइक की सूचना दुश्मन को देनी पड़े, यह तथ्य ही सिद्ध करता है कि वह फर्जीकल स्ट्राइक है। 1967 में इस्राइल ने जब मिस्र के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी तो क्या उसे मिस्र के जनरलों को बताना पड़ा था? मिस्र ही नहीं सारी दुनिया उसे तत्काल जान गई थी। यदि यह सचमुच की सर्जिकल स्ट्राइक होती तो उसके बाद क्या लगभग 200 बार हमारी सीमा का उल्लंघन होता ? और हमारे दर्जनों सैनिक मारे जाते ? 2016 जैसी घुसपैठ तो मौनी बाबा की सरकार कई बार कर चुकी थी लेकिन वे प्रधानमंत्री थे, प्रचारमंत्री नहीं।

ऐसी अधकचरी घुसपैठों का प्रचार करने से अपनी ही इज्जत को बट्टा लगता है। मोदी ने अपने आपका नाम लेकर कई सवालों के जवाब दिए। एक बार उन्होंने यह कहा कि ‘मोदी इतिहास में अमर नहीं होना चाहता’ यह कहकर वे सच्चाई के एकदम नजदीक पहुंच गए। चार साल में उन्होंने ऐसा कौनसा काम किया है, जिसकी वजह से इतहास में उनका नाम अमर हो सकता है ? क्या नोटबंदी, फर्जीकल स्ट्राइक, क्या जीएसटी ? हां, उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रचारमंत्री की तरह कुछ दिनों तक जरुर याद रखा जाएगा।

-डॉ.वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

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