रूस में लोग विश्वकप को लेकर उत्साहित नहीं

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विश्व के सबसे बड़े खेल महोत्सव फीफा विश्वकप का आगाज़ आज शाम 6.30 बजे से हो जाएगा| रूस पहली  बार फीफा विश्वकप की मेजबानी कर रहा है| जहां सारी  दुनिया इस खेल की दीवानी है वहीं रूस में इसका असर फीका पड़ता नज़र आ रहा है।  फीफा  का इतिहास रहा है कि जो भी देश इसकी मेजबानी करता है, वह पूरी तरह इसके रंग में रंग जाता है, लेकिन रूस के हालात बदले बदले नज़र आ रहे हैं।

रूस की राजधानी मॉस्को में भी फीफा का खुमार हल्का नज़र आ रहा है। मॉस्को की स्ट्रीट्स पर फुटबॉल, टी -शर्ट और झंडों की दुकानें तो नजर आ रही हैं, पर खरीदने वालों की कमी है। यदि ब्राज़ील विश्वकप से तुलना करे तो यहां की सड़कों पर खेलप्रेमियों का हुजूम मुश्किल से ही दिख रहा है।  रूस के स्थानीय लोगों में अपने देश के लिए जुनून और हौसला तो है, पर जो उत्साह एक मेजबान देश की जनता में होना चाहिए, वह कम ही नज़र आ रहा हैं।

मॉस्को में बाहर से फीफा विश्वकप देखने  आए लोग भी यही मानते हैं कि यहां वह उत्साह नहीं दिख रहा है, जो हमेशा हर देश में होता है। रूस के स्थानीय निवासी मानते हैं कि हमारी सरकार फीफा विश्वकप पर बहुत ज्यादा खर्च कर रही है | टैक्स देने वाले इतने सारे लोगों के रुपयों को किसी ख़ास काम में लगाना चाहिए। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि विश्वकप के दौरान वे रूस से बाहर जाना चाहते हैं| उनका मानना  है कि फीफा के कारण उनके देश में अव्यवस्था बढ़ेगी। रूस के फीफा विश्वकप पर विवादों का साया भी मंडराता रहा है चाहे वह अमरीकी चुनावों में कथित रुसी हाथ की जांच हो या फिर सीरिया युद्ध में रुस का रुख।

रुसी लोगों के बारे में एक कहावत है कि हम इरादों को लंबे समय तक अपने भीतर रखते हैं और सही समय पर एकाएक बाहर निकालते हैं। वे मानते हैं कि  जब फीफा शुरू होगा तो जबरदस्त तरीके से शुरू होगा, लेकिन हमें तो यह सिर्फ कहावत ही नजर आ रही है क्योंकि असल में माजरा कुछ और ही है।

वहीं कुछ रुसी फुटबॉल प्रेमी कह रहे कि हम तो मैच टीवी पर ही देखेंगे क्योंकि जितनी हमारी महीने की तनख़्वाह है, उतने का तो केवल एक टिकट आ रहा है।

सवाल रुस में फुटबॉल की दीवानगी को लेकर नहीं परंतु सवाल यह है कि क्या रुसी सरकार और फीफा उनकी फुटबॉल खेलने और देखने की दीवानगी को पूरा कर सकेगी। आज फीफा का आगाज़ हो गया है, धीरे-धीरे हमें हर सवाल का जवाब मिल जाएगा।

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