बाल मजदूरों की संख्या छू रही आसमान

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भारत में प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक और वैज्ञानिकों से लेकर चिंतकों तक सब एक वाक्य भारत के बारे में अक्सर कहते हैं कि यदि उन्नीसवीं शताब्दी ब्रिटेन की थी, बीसवीं शताब्दी अमरीका की तो इक्कीसवीं शताब्दी भारत की होगी और वे इसमें युवाओं के महत्व का बखान करना भी नहीं भूलते, लेकिन सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि भविष्य के जिन युवाओं के दम पर हम यह बात कर रहे हैं, वे तो आज बाल मजदूरी में लगे हैं|

बात यदि आंकड़ों की करें तो आज भारत में 1.01 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं| इनमें 80 प्रतिशत ग्रामीण तथा 20 प्रतिशत शहरी बच्चे हैं और इससे अधिक संख्या में वे बच्चे हैं, जो चौराहे पर भीख मांगते नज़र आते हैं| सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या मूलाधिकारों में सम्मिलित प्रावधान और समय-समय पर सरकारों द्वारा बनाए गए कानून इन बच्चों के लिए नहीं है या फिर सर्व शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण अभियान से इन बच्चों को बाहर रखा गया है| माता-पिता की कुछ मजबूरियां हो सकती है उन्हें बाल मजदूरी करवाने की, पर ये सरकारें, बुद्धिजीवी और शिक्षित लोग तथा प्रशासन जो आने वाली पीढ़ी को भारत का भविष्य बताते हैं क्या उनका इन आंकड़ों पर ध्यान नहीं जाता| ये आंकड़े, जो स्पष्ट करते हैं बचपन की दरिद्रता को, जो उल्लेखित करते हैं भारत के स्वर्णिम भविष्य के सूत्रधार के दर्दनाक वर्तमान को| यदि कोई योजना या कानून विधायिका बनाती है तो कार्यपालिका का कर्तव्य होता है उसे लागू करना|

हमें आज मंदिर-मस्जिद, गाय-गोबर पर लड़ने से फुरसत नहीं तो हम इन मुद्दों पर कब जाएंगे| आज जो एजेंसियां भारत में बेरोजगारी के बड़े-बड़े आंकड़े दिखाती है, क्या उन एजेंसियों को कभी ये बाल मजदूर नहीं दिखते ? असल बात तो यह है कि बाल मजदूरी ही देश में बेरोजगारी के कारणों में से एक कारण है| जो काम इस देश के युवाओं को करना था, वे काम निजी संस्थानों ने अपने फायदे के लिए बच्चों से करवाए और इन सबकी जानकारी सरकार और प्रशासन को होती है|

 

इसका एक पक्ष यह भी सामने आता है कि लाखों बच्चे बीच में ही किन्हीं कारणों से पढ़ाई छोड़कर बाल मजदूरी में लग जाते हैं, उसका वास्तविक कारण यह है कि राज्य सरकारें शिक्षा देने में असफल हुई तो निजी संस्थानों ने शिक्षा देने का काम शुरू किया, लेकिन हर कोई उनकी महंगी फीस न भर [पाया और वे बाल मजदूरी में लग गए| फिर स्थिति से उबरने के लिए सरकार ने कोई सार्थक प्रयास नहीं किया| इसलिए हम कह सकते हैं कि देश में बढ़ती बाल मजदूरी के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं|

                                                                                                      -बलराम यादव ‘बल्लू’                                                                                                                                           

 

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