अब बच्चे छुट्टियों में कहीं नहीं जाते

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गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और इसका पता शाम को मोहल्ले में बड़ी संख्या में खेलते बच्चों से पता लगता है| ये बच्चे या तो अपने परिजन के साथ घूमते-फिरते हैं या फिर ऐसे अनजान दोस्तों के साथ मस्ती कर रहे होते हैं, जिनसे पूरे साल उनका कोई ख़ास राबता नहीं रहता है| बच्चे बात भी करते हैं तो उनके विषय घर के अन्दर के ही होते हैं, जैसे किसी टीवी सीरियल या कार्टून की बातें|

कुल मिलाकर बच्चों का दिमाग अब घर में बंद होकर रह गया है| यदि कुछ साल पहले की गर्मी की छुट्टियों का स्मरण करें तो मन में उस वक्त की मीठी यादें  उतर जाती हैं| वे भी क्या दिन हुआ करते थे, जब बच्चे छुट्टियों में मामा के घर जाने की तैयारी परीक्षा शुरू होने से पहले ही कर लिया करते थे| बच्चों की योजना में किसके साथ क्या खेलना है, कितनी पेप्सी पीना है और नानी या दादी से किस दिन क्या बनवाना है, यह पहले से तय होता था|

दिन भले ही गर्मियों के होते थे, लेकिन कभी भी खेल में यह मौसम रुकावट नहीं बनता था| दोपहर में नाना या दादा जब एक-एक कुल्फी दिला देते थे तो गर्मी छू मंतर हो जाती थी| तब रसीले आमों का भी मौसम हुआ करता था| अब उन्हें बच्चे सालभर किताबों में पढ़ते जरूर हैं, लेकिन मौसम में ये नदारद ही रहते हैं|

शाम को कभी कभार लाइट चली जाती थी तो इस बहाने मोहल्ले में मस्ती और चिल्ला-पुकार कर बच्चे दूसरों की नाक में दम कर देते थे, लेकिन अब सरकार ने 24 घंटे बिजली देकर बच्चों से वह अधिकार भी छीन लिया|

पहले रात में अक्सर घर की गच्ची पर बिस्तर लगता था तो हम भाई-बहनों के साथ तारे गिनने की प्रतियोगिता में भाग ले लेते थे, लेकिन अब जैसे ही बच्चे फ्री होते हैं, वे स्मार्टफ़ोन में किसी न किसी गेम की लास्ट स्टेज से भी आगे जाने की तैयारी में नज़र आते हैं|

अब दादी की कहानियां भी उनकी स्मृति से ओझल होने लगी हैं क्योंकि किसी ने उन्हें बरसों से याद नहीं करवाया है| कुल मिलाकर अब गर्मियां तो हैं, लेकिन गर्मी की छुट्टियां नहीं हैं| लगातार हो रहे बदलाव का शिकार ये बच्चे भी हो जाएंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं था, लेकिन अब इसके परिणाम सभी को नज़र आ रहे हैं|

बावजूद इसके शायद ही कोई होगा, जो अपने बच्चों को फिर से वे पुरानी यादें लौटाना चाहेगा| वक़्त अभी भी है, अपने बचपन को उनके साथ जीने का, विलुप्त होते उन खेलों को अपनी पीढ़ी में प्रवाहित करने का और बचपन को बिना आधुनिक बनाए उसके मूल स्वरूप में रखने को….

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