कांग्रेस को इस कंपनी ने लगाया करोड़ों का चूना

0

प्रदेश में सत्ता वापसी की कवायद में जुटी कांग्रेस पार्टी अब एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस ने जिस कंपनी को मध्यप्रदेश में विज्ञापन जारी करने का ठेका दिया, उसने समाचार पत्रों और चैनलों के नाम पर सरकार को जबरदस्त चपत लगाई। प्रदेश कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ ’विज्ञापन वाली सरकार’ का नारा देने वाली गुजरात की  विज्ञापन कंपनी ‘निक्सन एड वर्ल्ड’ अब खुद करोड़ों के घोटाले में फंस गई है।

न्यूज चैनल, एफएम रेडियो को विज्ञापन देने से लेकर प्रदेश में कांग्रेस के समर्थन में होर्डिंग्स लगाने और विज्ञापनों की डिजाइन व चैनलों के लिए प्रोडक्शन तक में इस कंपनी द्वारा कारस्तानी की गई। घोटाले की भनक लगने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने ताबड़तोड़ कदम उठाते हुए इस कंपनी से काम वापस ले लिया है। कांग्रेस ने विज्ञापन के सारे सूत्र अब अपने हाथ में ले लिए हैं।

अब कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और सांसद अहमद पटेल की सीधी निगरानी में दिल्ली की विज्ञापन कंपनी ‘गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशन’ यह काम देख रही है। कांग्रेस आलाकमान ने सारे घोटाले की बारीकी से जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। वहीं निक्सन के बचे हुए बिलों के भुगतान रोक लिए गए हैं।

नेताओं का भी है नाम

कांग्रेस अपनी जांच  में कंपनी के कर्ताधर्ताओं के साथ कांग्रेस के उन नेताओं के बारे में भी पड़ताल करा रही है, जिनकी मिलीभगत से कंपनी ने 2013 और 2018 के चुनावों में कांग्रेस के प्रचार-प्रसार का ठेका हासिल किया था। अब कांग्रेस अपने ही भीतर छिपे उन जयचंदों पर भी कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने पार्टी में रहते हुए उसके खजाने में सेंध लगाने की कोशिश की थी।

दोबारा भी मिला एजेंसी को ही काम

जब कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश की जानी-मानी एजेंसियों के दावों को दरकिनार करते हुए जैसे ही दोबारा निक्सन एड वर्ल्ड को काम दिया था, तभी से इसमें घोटाले की बू आना शुरू हो गई थी। पिछली बार भी निक्सन के कामकाज को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन तब इसको किसी तरह दबा दिया था। इस बार शुरुआती  चुनाव प्रचार के काम में निक्सन ने चंद रीजनल न्यूज चैनलों के साथ एफएम रेडियो पर विज्ञापन जारी किए। साथ ही प्रदेश  कांग्रेस के लिए क्रिएटिव और प्रोडक्शन काम भी किया। बात जब प्रिंट मीडिया को विज्ञापन देने की आई तो निक्सन ने बजट खत्म हो जाने की बात करते हुए और बजट की मांग की। कांग्रेस हाईकमान को पता चला कि बजट इतनी जल्दी इसलिए खत्म हो गया क्योंकि बीस रुपए का काम सौ रुपए में कराया गया है।

सूत्रों की माने तो प्रोडक्शन से लेकर प्रदेश भर में होर्डिंग्स लगाने के काम में जमकर घपले हुए। बड़े नेताओं को दिखाने के नाम पर भोपाल और कुछ अन्य बड़े शहरों में प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग्स लगाए गए ,लेकिन बिल पूरे प्रदेश के नाम पर वसूले गए। निक्सन को काम दिलाने के पीछे कांग्रेस के एक बड़े नेता की जिद थी।

पिछली बार उन्हीं नेता ने कांतिलाल भूरिया के अध्यक्ष रहते गुजरात की इस कंपनी को काम दिलाया था। इस बार भी उन्होंने जिद करके कमलनाथ से इसी कंपनी के नाम पर हामी भराई। सूत्रों का दावा है कि गुजरात में नेताजी के दामाद के इस कंपनी के मालिक निकुंज मेहता से करीबी संबंध होने के कारण निक्सन को उपकृत किया। निक्सन के कथित घपले में कांग्रेस के मीडिया विभाग के जुड़े कुछ लोगों के साथ पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के एक करीबी  सहयोगी का नाम भी उछला है। पिछले चुनाव में भी वह निक्सन के मददगार थे।

निक्सन से परोक्ष रूप से जुड़े कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर दावा किया कि निक्सन को हटाया नहीं गया उसने स्वयं मंगलवार प्रिंट मीडिया में प्रचार प्रसार के काम से हाथ खींचा है। लेकिन सूत्रों की मानें तो मामला प्रकाश में आते ही ऐन मतदान के पूर्व कांग्रेस के मुखिया राहुल गांधी के निर्देश पर निक्सन को रूखसत करने और मध्यप्रदेश में विज्ञापन मंजूर करने की कमान पार्टी के खजांची अहमद पटेल  को सौंपने का फैसला क्यों करना पड़ा। पिछली बार निक्सन भूरिया के चलते एक्सपोज  नहीं हो पाई थी। लेकिन कमलनाथ को पहले से सारे गड़बड़झाले का अंदाजा था, इसीलिए उन्होंने अपने हाथ खींचते हुए गेंद दिल्ली के पाले में डाल दी।

Share.