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कमलनाथ युग का आगाज़

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कांग्रेस के लिए सोमवार का दिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। साथ ही राजस्थान में अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दरमियान भोपाल में कर्नाटक के बाद एक बार फिर से विपक्षी एकता देखने को मिली।

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महागठबंधन की ज़ोर पकड़ती मुहिम में मनमाफिक नतीजों से विपक्ष का साहस दोगुना हुआ है। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह, चंद्रबाबू नायडू, तेजस्वी यादव, एचडी देवेगौड़ा और शरद पवार सहित कई विपक्षी दिग्गजों ने एक बार फिर संदेश दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में देश की जनता के सामने वे सशक्त विकल्प प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

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निश्चय ही कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह नायक की भूमिका निर्वहन कर, सर्वधर्म समभाव की राह चलते केंद्रीय सत्ता में बैठे दल की प्रत्येक चाल की काट पहले से तैयार रखना चाहती है। यह वक्त की ज़रूरत भी है, तीनों प्रदेशों के सीएम के पास कम समय है। चंद महीनों में चमत्कार कर दिखाना है। उन वादों की इमारतों की नींव डालनी है, जिनके आधार पर जनता ने उन्हें सत्ता में बैठाया।

किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर साइन करते कमलनाथ. PHOTO- ANI

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के युग का आगाज़ हुआ। 15 सालों से प्रदेश में भाजपा सरकार थी। ऐसे में अब कमलनाथ को सीएम के तौर पर सूझबूझ का परिचय देना होगा। वे उन नेताओं में से हैं, जिन्हें हमेशा जनता का भरोसा मिला है। अब चुनौती बड़ी है। वे अनुभव, साहस और कर्मठता पर हमेशा खरे उतरते आए हैं। 9 बार सांसद होने के साथ ही कई अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन उन्होंने सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने पर्यावरण, कपड़ा एवं वाणिज्य जैसे मंत्रालय संभाले और कार्यकाल शानदार और समन्वयकारी रहा।

Kamalnath On Bihari: मध्य प्रदेश का सीएम बनते ही बिगड़े कमलनाथ के बोल, कहा- बिहारी यहां आकर हमारी नौकरी खा जाते हैं (तस्वीर साभार-इंस्टाग्राम)

26 अप्रैल 2018 को वे मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने वही काम किया, जिसकी उम्मीद थी। अब कमलनाथ पर प्रदेश के विकास की गति देने की अहम जिम्मेदारी है। शपथ लेते ही उन्होंने अपने किए वादों को पूरा किया। शपथ लेने के बाद उन्होंने मंत्रालय जाकर किसानों की कर्ज़ माफी, 70 फीसदी रोज़गार प्रदेश के युवाओं को, गोशाला, कन्या विवाह में 51 हजार रुपए की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। कमलनाथ के इस प्रयास से भाजपा के मुंह पर ताले लग गए, लेकिन आगे उन्हें पार्टी के भीतर विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करना होगा। कमलनाथ के छिंदवाड़ा मॉडल को भी काफी सराहा गया है। ऐसे में अब उन्हें पूरे मध्यप्रदेश का एक बेहतर मॉडल तैयार करना होगा। कमलनाथ के सामने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कसौटी होगी।

– कुशाग्र वालुस्कर

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