जब 51 बैलों वाले रथ में हुआ था नेताजी का स्वागत

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‘जय हिंद’ और ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ का नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज पुण्यतिथि है| उनका जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को ओडिशा के  कटक शहर में हुआ था| उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था| जानकीनाथ बोस कटक शहर में वकालत करते थे| उनकी 6 बेटियां और 8 बेटे थे, जिनमें से सुभाष उनकी नौवीं संतान थी| 24 साल की उम्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय नेशनल कांग्रेस से जुड़े और अपने आकर्षक व्यक्तित्व एवं क्रांतिकारी विचारों से सबको अपना कायल बना दिया|

गांधीजी से पहली मुलाक़ात

मुंबई में जब महात्मा गांधी मणिभवन में निवास करते थे, तब 20 जुलाई 1921 को सुभाष ने उनके साथ पहली बार मुलाक़ात की| इस मुलाक़ात के दौरान गांधीजी ने उन्हें कोलकाता जाकर दासबाबू के साथ काम करने की सलाह दी| इसके बाद सुभाष कोलकाता आकर दासबाबू से मिले| उस समय गांधी अपना असहयोग आंदोलन चला रहे थे|

नेताजी सुभाषचंद्र बोस – 11 बार गए जेल

अपने जीवन में नेताजी 11 बार जेल गए| सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ था| 1932 में सुभाष जब वे अल्मोड़ा जेल में थे, तब उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उन्हें चिकित्सकों की सलाह पर इलाज के लिये यूरोप भेजा गया| वहां पर उनकी मुलाकात एमिली से हुई, जो उनकी जीवन संगिनी बनीं|

वर्ष 1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरिपुरा में होना तय हुआ| इससे पहले ही गांधीजी ने नेताजी को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुना| वह कांग्रेस का 51 वां अधिवेशन था इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सुभाषचन्द्र बोस का स्वागत 51 बैलों द्वारा खींचे हुए रथ में किया गया| उस दौरान उनका अध्यक्ष पद पर पहला भाषण बहुत प्रभावी था, लेकिन उन्हें ज्यादा समय तक  कार्यपद्धति पसंद नहीं आई। इसी दौरान यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध के बादल छा गए थे| सुभाष चाहते थे कि इंग्लैंड की इस कठिनाई का लाभ उठाकर भारत का स्वतन्त्रता संग्राम अधिक तीव्र किया जाए | उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में इस ओर कदम उठाना भी शुरू कर दिया था परन्तु गांधीजी इससे सहमत नहीं थे| 29 अप्रैल 1939 को सुभाष ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया|

3 मई 1939 को सुभाष ने कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक के नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की, लेकिन कुछ दिन बाद ही सुभाष को कांग्रेस से निकाल दिया गया| बाद में फॉरवर्ड ब्लॉक अपने आप एक स्वतंत्र पार्टी बन गई| अंग्रेज सरकार ने सुभाष सहित फॉरवर्ड ब्लॉक के सभी मुख्य नेताओं को कैद कर लिया| द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सुभाष जेल में निष्क्रिय रहना नहीं चाहते थे| सरकार को उन्हें रिहा करने पर मजबूर करने के लिए सुभाष ने जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया| हालत खराब होते ही सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया, लेकिन सरकार ने उन्हें उन्हीं के घर पर नजरबंद कर दिया|

16 जनवरी 1941 को वे पुलिस को चकमा देते हुए एक पठान मोहम्मद ज़ियाउद्दीन के वेश में अपने घर से निकले और फिर अपने कार्य में लग गए| द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद नेताजी ने  रूस से सहायता मांगने का निश्चय किया था| वे 18 अगस्त 1945 को जहाज से मंचूरिया जा रहे थे। इस सफर के दौरान वे लापता हो गए| इस दिन के बाद से वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिये| इसी दिन देश ने एक क्रांतिकारी नेता को खो दिया| आज ‘टैलेंटेड इंडिया’ उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करती है|

पुण्यतिथि विशेष : नेताजी की प्रेम कहानी नहीं जानते होंगे आप..

नेताजी को शत-शत नमन !

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