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जिनके दर्शन मात्र से होती है पुण्य की प्राप्ति

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हिन्दी कैलेंडर के अनुसार, माघ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है| इस साल नर्मदा जयंती का पर्व 12 फरवरी को मनाया जा रहा है| नर्मदा नदी का वर्णन रामायण, महाभारत आदि अनेक धर्मग्रंथों में किया गया है इसलिए यह भारत की सबसे पावन नदियों में से एक है| कहा जाता है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का क्षय होकर पुण्य की प्राप्ति होती है|  

नर्मदा भारत की मात्र एक ऐसी नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है| माना जाता है कि नर्मदा नदी के हर घाट पर पवित्रता का वास होता है| माना जाता है कि महर्षि मार्कण्डेय, अगस्त्य, महर्षि कपिल एवं कई ऋषि-मुनियों ने इसके तट पर तपस्या की है| माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य के मंडन मिश्र को शास्त्रार्थ में पराजित किया था|

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, कुल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर इसी के तट पर बसा हुआ है| वर्तमान समय में देखा जाए तो कई तीर्थ गुप्त रूप में स्थित हैं| चंद्र की तपस्या के कारण ही सोमेश्वर तीर्थ आदि 55 तीर्थ नर्मदा के अलग-अलग घाटों पर स्थित हैं| बताया जाता है कि एक बार शंकर भगवान् लोक कल्याण के लिए तपस्या करने मैकल पर्वत पहुंच गए थे| उनके पसीने की बूंदों से पर्वत पर एक कुण्ड का निर्माण हुआ, जो शांकरी व नर्मदा कहलाई| शंकर भगवान् के आदेश के बाद से ही यह नदी भारत के एक बड़े हिस्से में प्रवाहित होने लगी|

मैकल पर्वत पर उत्पन्न होने से इस नदी को मैकलसुता के नाम से भी जाना जाता है| इसके बहाव से रव (आवाज़) उत्पन्न होती है, जिससे इसे रेवा भी कहा जाता है| भारत देश के मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी का एक बड़ा हिस्सा लाभान्वित है| नर्मदा नदी की कई सहायक नदियां भी हैं, जो किसी भी तरह के डेल्टा का निर्माण नहीं करती| नर्मदा और ताप्ती ही ऐसी नदियां हैं, जो पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती हैं|

-आसिफ़

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