पुण्यतिथि विशेष: विश्वमाता मदर टेरेसा थीं प्रेम की मूरत

0

गरीब, बेसहारा और असहाय लोगों की मदद कर विश्वमाता बनी मदर टेरेसा ने आज ही के दिन यानी 5 सितंबर, 1997 को दुनिया को अलविदा कहा था| उनके बलिदान, निःस्वार्थ सेवा और परिश्रम के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है| मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को यूगोस्लाविया के स्कॉप्जे में हुआ था| उनका असली नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था| सिर्फ 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने दीक्षा ली और सिस्टर टेरेसा बन मानवता के कार्यों में जुट गईं| वे रोमन कैथोलिक नन थीं, लेकिन उनके पास भारत की भी नागरिकता थी|

1929 में मदर टेरेसा कोलकाता आईं और ईसाई ननों की तरह अध्यापन से जुड़ गईं| वे एक स्कूल में पढ़ाती थीं| कोलकाता के सेंट मैरीज हाईस्कूल में पढ़ाने के दौरान एक दिन कॉन्वेंट की दीवारों के बाहर फैली दरिद्रता देख वे विचलित हो गईं| उनसे दूसरों की पीड़ा देखी नहीं गईं| तभी से उन्होंने आसपास के गरीबों की सेवा करना शुरू कर दी| उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए एक स्कूल खोला| इसके बाद ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ नामक एनजीओ की स्थापना की| उनके साथ इस कार्य में कई लोग जुड़ते चले गए और सन् 1996 तक उनकी संस्था ने करीब 125 देशों में 755 निराश्रित गृह खोले, जिनसे करीबन 5 लाख लोगों का पेट भरने लगा|

कहा जाता है कि मदर टेरेसा ने मैला ढोने वालों को सम्मान देने के लिए पूरी ज़िंदगी नीली धारी वाली सफेद साड़ी पहनी| वे स्वयं लाखों लोगों के इलाज में जुट गईं और शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ी गईं | 5 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से मदर टेरेसा का कोलकाता में निधन हो गया था| वे शां‍ति की दूत थीं| उन्होंने मानवता की मिसाल कायम की| आज निर्मल हृदय मदर टेरेसा की पुण्यतिथि पर ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ओर से उन्हें शत शत नमन…|

Share.