खदान में फंसे 13 मजदूरों की अहमियत कितनी ?

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आज से 13 दिन पहले मेघालय के जयंती हिल्स में एक दर्दनाक हादसा हुआ था| 13 दिसंबर को अचानक पानी बढ़ जाने के कारण सैकड़ों फीट गहरी अवैध कोयला खदान धंस गई थी| इस हादसे में खदान में काम कर रहे 13 मजदूर दब गए (13 People Still Trapped In Mine In Meghalaya) थे, जो अभी भी खदान में ही फंसे हैं| वे पिछले तेरह दिनों से ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन शायद बहुत ही कम लोग इस हादसे के बारे में जानते होंगे| हमें याद है कि कुछ समय पहले ऐसा ही एक हादसा थाइलैंड में भी हुआ था, उस हादसे का शोर केवल थाइलैंड में ही नहीं पूरी दुनिया में सुनाई दिया था|

भारत में मजदूर जिस खदान में फंसे (13 People Still Trapped In Mine In Meghalaya) हुए हैं, वहां 70 फीट तक पानी भरा हुआ है, लेकिन पानी के अलावा कोयले और मिट्टी का मिश्रण भी है, जिसके कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है| कोयले और मिट्टी के मिश्रण के कारण पानी पूरी तरह से काला हो चुका है| खदान में अंधेरा होने के कारण मजदूरों की स्थिति का पता लगाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है|

थाईलैंड की गुफा में 17 दिनों तक 12 बच्चे और उनके कोच फंस गए थे, जिन्हें बचाने के लिए दुनियाभर के तैराक सामने आए थे| अब ठीक वैसी ही स्थिति भारत के इन 13 मजदूरों (13 People Still Trapped In Mine In Meghalaya) की भी हो गई है| थाईलैंड के जैसी ही भारत में बनी स्थिति में अंतर बस इतना है कि थाईलैंड में बच्चों के गुफा में फंसने की खबर जंगल में लगी आग की तरह पूरी दुनिया में फ़ैल गई थी|

भारत में इसे अहम मुद्दा माना जा रहा था, लेकिन मेघालय में फंसे इन मजदूरों (13 People Still Trapped In Mine In Meghalaya) की सहायता के लिए जागरूकता नहीं फैलाई जा रही है| न ही कोई बड़ा मीडिया चैनल इसे प्राथमिकता से दिखा रहा है| ये है हमारा भारत, जहां के लोग केवल नेम-फेम के पीछे भागने की होड़ में अपने देश का दुःख ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं| क्या खदान में फंसे उन 13 मजदूरों की कोई अहमियत नहीं है? उनकी जान की कोई कीमत नहीं?

जब थाईलैंड में हादसा हुआ था, तब हमारे देश के कई प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल भी वहां लाखों का खर्च करके पहुंच गए थे, लेकिन अब जब बात भारत के मजदूरों की हैं तो कोई हजारों खर्च करके भी वहां नहीं पहुंच पा रहा है| न ही मजदूरों के बारे में कोई जानकारी जुटा रहे हैं| इस अवैध खदान में पास की लितेन नदी का पानी भरने के बाद से ये मजदूर फंसे हैं| फिलहाल बचावकर्मी इन तक पहुंचने के लिए पंप से पानी बाहर निकाल रहे हैं| केंद्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन बल के 100 से ज्यादा कर्मचारी स्थानीय पुलिस के साथ बचाव अभियान में जुटे हैं| मीडिया ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी क्यों साध रखी है, यह सवाल तो सभी के मन में उठ सकता है|

यह है थाईलैंड में फंसे बच्चों की स्थिति, जिन्हें बचाने के लिए विदेशी गोताखोरों की लाइन लग गई थी|

हमारे देश में जब हादसा हो जाता है, उसके बाद लोगों की नींद खुलती है| 4 साल पहले ही मेघालय में असुरक्षित तरीके से हो रहे कोयला खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी थी, लेकिन हादसे के पहले तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया| वहां रोक के बावजूद गैर कानूनी तरीके से यह धंधा चलता रहा और अब इस अनदेखी का शिकार बने हैं 13 मजदूर, जिन पर अभी भी देश विशेष ध्यान नहीं दे रहा है|

 – रंजीता पठारे

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