महागठबंधन बोले तो वक़्त की नज़ाकत

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महागठबंधन बोले तो समय की मांग | कहते है हवा के रुख को भांप कर जहाज की मस्तूल ( पाल ) बांधना समझदार नाविक की निशानी है | मौजूदा सियासत में विपक्ष की भूमिका वाले जहाज पर बैठे ज्यादातर दल इस समझदारी के सूत्र को अपना चुके है | ये बात और है कि जहाज एक है और उसके अनेक नाविक और अनेक मस्तुले है | ऐसे में बेड़े का पार हो जाना संशय के घेरे में है | दूसरा चारा भी नहीं है | बहरहाल समय के हिसाब से महा-गठबंधन का विचार एक दम सही है |

शक्तिशाली से टक्कर लेने से पहले शक्ति संचय करने में बुराई क्या है ? चाहे वह कड़वी औषधि से ही मिले | वे सियासी दल जो एक दूसरे को फूटी आँखों नहीं सुहाते थे और उनके नेता एक दूसरे पर बयानबाजियों के दौरान भाषाशैली की तमाम हदें पार कर चुके थे, आज एक मंच पर खड़े होकर एक-दूसरे के दोनों हाथों को हाथ में लेकर साथ निभाने का वादा उच्च स्वर में कर रहे है| यह कड़वी औषधि पी लेने से कम है क्या ? मौजूदा सरकार को सत्ता से बेदखल करने की यह बेचैनी अच्छी और बुरी दोनों है | मौजूदा वक़्त की नज़ाकत के लिहाज से मजबूती और मज़बूरी दोनों के लिए एक मात्र विकल्प ”महागठबंधन” लगभग तय है| मगर जो तय नहीं है वो है, इसका सेनापति | यह सबसे बड़ा सवाल है कि अगुवाई करेगा कौन? सवाल मौके और दस्तूर के लिहाज से लाजमी है |

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फ़िलहाल सब गर्दिश में है | सब से मतलब सरकार और विपक्ष दोनों | हालियां विधानसभा चुनाव परिणामों ( विशेषकर मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़) ने सरकार को आईना दिखा दिया है | दूसरी ओर विपक्ष 2014 से ही बेहोश पड़ा है | उसके पास खोने को कुछ है नहीं और पाने को सारा जहान| मगर महागठबन्धन की बूटी जनता को पिलाना इतना आसान नहीं है | क्योकि जनता जानती है कि जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों, पर वह यह जानना चाहती है कि जिसके बहुत सारे उसका कौन ? फिर वो ये भी सवाल करती है कि इन सब में से किसी एक पर भरोसा कैसे और क्यों करे ? वैसे भी ये जो सारी उधेड़बुन है जनता के लिए ही तो की जा रही है |

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महागठबंधन का फार्मूला और बीजेपी का विजेता जहाज 2019 में आमने-सामने होंगे जो देश की सियासत की आगे की देश और दिशा का निर्धारण करेंगे | 2019 में बीजेपी का जीतना जहा ऐतिहासिक राजनीतिक दौर की शुरुआत कही जा सकती है, वही महागठबंधन का बीजेपी के सपनों को चकनाचुर कर देना एकता की शक्ति और सियासत में सब संभव है का जीवंत उदाहरण होने के साथ राजनीति के असली चेहरे का फिर सामने आ जाना होगा |

-अभिषेक

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…तो दोबारा भाजपा सरकार बना सकती है 

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