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नेवी डे : जानिए, क्यों और कब से हुई शुरुआत…

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प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को नौसेना के वीरों के जज़्बे और जीत की ख़ुशी में ‘भारतीय नौसेना दिवस’ यानी नेवी डे मनाया जाता है| भारतीय नौसेना, सेना का सामुद्रिक अंग है, जो न केवल भारतीय सामुद्रिक सीमाओं की बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए भी हमेशा डटे रहते हैं| नेवी अपने गौरवशाली इतिहास के लिए भी जाना जाता है| हमारे जांबाज़ों ने आज के ही दिन दुश्मन के छक्के छुड़ाकर उनके जलपोतों को नेस्तनाबूद कर दिया था, जिसके जश्न के रूप में भी आज का दिन यानि ‘नेवी डे’ मनाया जाता है|

नौसेना का नीति वाक्य है शं नो वरुण:, इसका मतलब है कि जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें| इसी कामना के साथ नौसेना के जवान देश की रक्षा और मंगल कामना के साथ तटों पर डटे रहते हैं, लेकिन जब दुश्मन का आतंक बढ़ जाता है तो मंगलकामना करने वाले ये जांबाज़ ही दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते हैं|

‘नेवी डे’ की ऐसे हुई शुरुआत

नेवी डे’ का दिन हमारे और हमारे सबसे बड़े दुश्मन देश यानी पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है| वर्ष 1971 में हमारे जवानों ने पाकिस्तान के जलपोतों को ध्वस्त कर दिया था| दरअसल, 4 दिसंबर 1971 को ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के जरिये हमारे जवानों ने दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए कराची नौसैनिक अड्डे पर हमला किया| वर्ष 1947 और 1965 के बाद 1971 में यह तीसरा मौका था, जब भारत अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से जंग लड़ रहा था और उसमें भी सफलता हासिल की| उस समय ऐसा पहला मौक़ा था, जब दोनों देशों की नौसेना आमने-सामने थी|

कैसे हुई हमले की शुरुआत

1971 में भारत और पाकिस्तानी नौसेना के मध्य हुए युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान की ओर से ही की गई थी|  3 दिसंबर को पाकिस्तान ने हमारे हवाई क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्र में हमला किया, जिसके बाद भारतीय जांबाजों ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ चलाया| इस हमले में भारत ने  3 विद्युत क्‍लास मिसाइल बोट, 2 एंटी-सबमरीन और एक टैंकर का उपयोग किया| इसी युद्ध में भारत ने  जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल  से भी पहली बार हमला किया था| इस हमले में कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ था, लेकिन पाकिस्तान के सैकड़ों सैनिक मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे| इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को कमजोर कर दिया था| इस युद्ध के बाद भारत की ताकत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध में भारत को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ था|

जानिए, कैसे बन सकते हैं नौसेना के अधिकारी

नेवी में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है| ‘भर्ती संघ लोक सेवा आयोग’ ‘सीधी भर्ती स्थायी कमीशन/शॉर्ट सर्विस कमीशन’, विश्वविद्यालय भर्ती योजना’ के माध्यम से नेवी ऑफिसर की भर्ती की जाती है| यूपीएससी की ओर से आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा में पास होने के बाद ‘सर्विस सिलेक्शन बोर्ड’ द्वारा साक्षात्कार लिया जाता है, इसके बाद नियुक्ति की जाती है|

छुट्टियां – नौसेना अधिकारी को 60 दिनों की सालाना और 20 दिनों की आकस्मिक छुट्टियां मिल सकती है| अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य साल में एक बार छुट्टी पर मुफ्त रेल या हवाई यात्रा का लाभ भी उठा सकते हैं| वहीं भारतीय नौसेना में प्रत्येक अधिकारी और नौसेनिक के साथ-साथ उनके परिवारों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सकीय सुविधाएं मिलती है|

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