लोगों के दिलों में बसते हैं बाबा आमटे

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बाबा आमटे यानी डॉ.मुरलीधर देवीदास आमटे की आज जयंती (Baba Amte Birth Anniversary 2018) है। इस अवसर पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बाबा आमटे का जन्म 26 दिसंबर 1914 को हुआ था। 9 फरवरी 2008 को उन्होंने अंतिम सांस ली। वे भारत के प्रमुख व सम्मानित समाजसेवी थे। कुष्ठ रोगियों के लिए उन्होंने आश्रमों और समुदायों की स्थापना की। इसके अतिरिक्त आमटे ने अनेक सामाजिक कार्य किए, जिनमें वन्य जीव संरक्षण और नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख हैं।

महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगनघाट शहर में जन्मे बाबा आमटे (Baba Amte Birth Anniversary 2018) के पिता का नाम देवीदास आमटे और माता का नाम लक्ष्मीबाई आमटे था। उनके पिता ब्रिटिश गवर्नमेंट ऑफिसर थे। बाबा आमटे ने एमए.एलएलबी. की पढ़ाई की। बाबा आमटे ने कई दिनों तक वकालत भी की। महात्मा गांधी और विनोबा भावे से प्रभावित बाबा आमटे ने सारे भारत का दौरा कर देश के गांवों में अभावों में जीने वाले लोगों की असली समस्याओं को समझने का प्रयास किया। देश की आज़ादी की लड़ाई में बाबा आमटे अमर शहीद राजगुरु के साथ रहे। फिर राजगुरु का साथ छोड़कर वे गांधी से मिले और अहिंसा का मार्ग अपना लिया।

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अभय साधक

बाबा आमटे (Baba Amte Birth Anniversary 2018) ने ब्रिटिश सैनिकों की एक लड़की की जान बचाई थी, जिसके बाद गांधीजी उनके मुरीद हो गए। घटना के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें अभय साधक का नाम दिया था। उन दिनों कुष्ठ रोग समाज में तेज़ी से फैल रहा था। लोगों में ऐसी ग़लतफहमी घर पर गई थी कि यह बीमारी जानलेवा है। ऐसे में आमटे ने लोगों की इस गलतफहमी को दूर किया और कुष्ठ रोग से प्रभावित मरीजों के उपचार की कोशिश की।

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आश्रम की स्थापना

बाबा आमटे (Baba Amte Birth Anniversary 2018) ने गरीबों की सेवा और उनके सशक्तीकरण के लिए महाराष्ट्र में तीन आश्रमों की स्थापाना की। 15 अगस्त 1949 को उन्होंने आनंदवन में एक पेड़ के नीचे अस्पताल की शुरुआत भी की। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक कार्यों में लगा दिया। इनमें मुख्य रूप से लोगों में सामाजिक एकता की भावना को जागृत करना, जानवरों का शिकार करने से रोकना और नर्मदा बचाओ आंदोलन शामिल है।

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कश्मीर से कन्याकुमारी तक आंदोलन

सन् 1985 में बाबा आमटे (Baba Amte Birth Anniversary 2018) ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत जोड़ो आंदोलन चलाया था। इस आंदोलन को चलाने के पीछे उनका मकसद देश में एकता की भावना को बढ़ाना देना और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। आमटे के कार्यों को लिए उन्हें 1971 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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प्राप्त अवार्ड

– 1983 में अमरीका का डेमियन डट्टन पुरस्कार

– 1985 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार

– 1988 में घनश्यामदास बिड़ला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

– 1988 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सम्मान

– 1986 में पद्मभूषण

– 1991 में ग्लोबल 500 संयुक्त राष्ट्र सम्मान

– 1992 में राइट लाइवलीहुड सम्मान

– 1999 में गांधी शांति पुरस्कार

जानें मदनमोहन मालवीय के बारे में…

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