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भगवान भरोसे कर्नाटक की अवाम

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कर्नाटक में जब से कांग्रेस -जेडीएस की सरकार बनी है उसी दिन से सरकार एक पल भी राहत की साँस नहीं ले पाई है | जैसे-तैसे बीजेपी को सत्ता से दूर रखने की कवायद कामयाब तो हुई, लेकिन सरकार कभी भी सरकार नहीं लगी | ऐसे में सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है सूबे की जनता का जो विकास की बाट जोह रही है और फ़िलहाल सरकार खुद को बचाने में लगी है| कर्नाटक का गणित कुछ ऐसा है | 224 विधानसभा सीटें हैं, बहुमत का आंकड़ा 113 है|

Karnataka Political Crisis : जानिए दिनभर का घटनाक्रम

इसमें बीजेपी के 105 विधायक हैं| जबकि कांग्रेस के पास 80 और जेडीएस के पास 37 विधायक हैं| इस तरह से दोनों के पास कुल 117 विधायक हैं| बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और निर्दलीय विधायक भी गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं| लेकिन, 13 विधायकों को इस्तीफे से गठबंधन सरकार के पास 104 विधायक रह जाते हैं और सरकार अल्पमत में है |(Karnataka political crises)

दरअसल, यह खीचतान की राजनीति के चरम प्रतिशोध और कांग्रेस विहीन भारत की कल्पना की उपज है| कांग्रेस -जेडीएस मिलकर भी बीजेपी का सामना करने में असक्षम है और बीजेपी पहले दिन से इसी ताक में बैठी है कब मौका मिले और वह चौका लगाए| कांग्रेस अपनी कमजोरी तभी जाहिर कर चुकी थी जब उसने जेडीएस का हाथ थाम कमान कुमारस्वामी को सौपने की बात मान ली थी|

कर्नाटक का राजनीतिक संग्राम राष्ट्रपति शासन की ओर!

लेकिन इन सियासी समीकरणों में उलझ कर रह गया है, कर्नाटक का विकास | एक सूबे की जनता ने सरकार चुनी और अलगे दिन से वह सरकार के द्वारा किये जाने वाले कामों की ओर देखती है , लेकिन कर्नाटक में सरकार को कुर्सी बचाने से ही फुर्सत नहीं मिली तो काम क्या करती |

ख़त्म होती कांग्रेस

ऊपर से सीएम स्वामी ने जनता को कहा दिया है कि वोट मोदी को और काम मुझ से ऐसा नहीं चलेगा | अब कई सवाल है और अंत क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है| एक बात और है कि यदि यदाकदा कुमार स्वामी सरकार बचा भी लेते है तो क्या अगले चुनाव जनता इस तरह की पार्टी का दामन थामेगी जो खुद की कुर्सी के लिए संघर्ष में ही अपना कार्यकाल बिता दें |

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