बस इन्सान ने साथ छोड़ दिया है

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देश में इस समय मानव जाति को कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है| कहीं बेमौसम बारिश होती है तो कहीं लोग पानी की एक बूंद को तरसते हैं| कहीं भीषण गर्मी लोगों की जान ले लेती है तो कहीं कड़ाके की ठंड की वजह से लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ती है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि इन सब का जिम्मेदार आखिर कौन है? आज हम जिन प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं, उन सब के जिम्मेदार खुद हम ही हैं| जाने-अनजाने में हम सभी प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप हम सभी को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है|

जल आज भी अपनी शीतलता से हमारी प्यास बुझाता है, पेड़-पौधे आज भी स्वच्छ ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, सब्जियां और फल आज भी हमें पोषक तत्व प्रदान करते हैं, गाय आज भी अपने दूध से हमें ताकतवर बनाती है, बस एक इनसान ही है, जिसने प्रकृति का साथ छोड़ दिया है| प्रकृति का हर संसाधन अपना काम बखूबी कर रहा है, बस इन्सान ने ही प्रकृति का साथ छोड़ दिया है|

आज इन्सान प्रकृति द्वारा दी गई हर अनमोल चीज नष्ट करने पर तुला है| वृक्ष काटकर अपने आशियाने बना रहा है| धरती को छेदकर पानी निकाल रहा है| जंगली जानवरों का शिकार कर पृथ्वी को बदसूरत बना रहा है| बेवजह पानी बहा रहा है| जाने-अनजाने ही सही हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के शत-प्रतिशत जिम्मेदार हैं|

किस तरह करें प्रकृति का संरक्षण?

अपने घर में पेड़-पौधे लगाएं, यदि हो सके तो जमीन खरीदकर घर की जगह छोटे-छोटे जंगलों का निर्माण करें| पानी को बहने न दें, बाथरूम में फ्लश और शॉवर की जगह बाल्टी का उपयोग करें| प्लास्टिक के उपयोग से बचें| कचरे को खुले में न फेंकें| जंगली-जानवर, पशु-पक्षियों को पिंजरे में बंद न करें| बस ये छोटे-छोटे से काम कर आप प्रकृति का संरक्षण कर सकते हैं|

–  ह्रदय कुमार नामदेव  

 

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