बस, बयानों के गोले दागते रहें

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अभी भारत-पाक संघर्ष-विराम का फैसला हुए एक हफ्ता भी नहीं बीता कि सीमा पर पाकिस्तानी हमला हो गया, जिसमें दो भारतीय जवान मारे गए और लगभग दर्जनभर लोग घायल हो गए। यह हमला तब हुआ, जब दोनों देशों के सैन्य महानिदेशकों ने 2003 के युद्ध-विराम समझौते को ईमानदारी से लागू करने का संकल्प लिया था। नियंत्रण-रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के उल्लंघन की सारी सीमाएं पाकिस्तान लांघता चला जा रहा है और हमारी सरकार को बयानबाजी और भाषणबाजी से फुर्सत ही नहीं है। पाकिस्तान ने रमजान माह का लिहाज भी नहीं किया। कश्मीर में भी घुसपैठ करके उसने खून बहाया। भारत सरकार ने रमजान के महीने को शांति और वार्ता का महीना घोषित किया था, लेकिन आतंकवादियों और उनके पोषकों पर इस भलमनसाहत का भी कोई असर नहीं हुआ।

भारत सरकार अब क्या करे ? बस बयानों के गोले दागती रहे ? भारत की जनता को बुद्धू बनाती रहे ? ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का झुनझुना हिलाती रहे। इस पाखंड को भुनाती रहे। हमारा विपक्ष इतना निकम्मा है कि वह इस पाखंड को आज तक काट नहीं पाया। इस साल पाक फौजों ने 1252 बार सीमा का उल्लंघन किया, 143 आतंकी घटनाएं हुईं, हमारे दर्जनों जवान मारे गए और हमारे सर्वज्ञजी सारी दुनिया में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का ढोल पीट रहे हैं। वह सर्जिकल नहीं, फर्जीकल स्ट्राइक थी। सर्जिकल स्ट्राइक क्या होती है, यह सर्वज्ञजी को पता ही नहीं। 1967 में इस्राइल ने मिस्र के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

उसके बाद मिस्र ने आज तक करवट भी नहीं बदली है। हमारी बहादुर फौज को बदनाम करने का सबसे सरल तरीका यही है कि सीमांत की छिटपुट कार्रवाई को हम ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कहने लगे। इस पाखंड से पाकिस्तानी फौज का मनोबल ऊंचा उठता है और वह हम पर निरंतर हमले बोलती रहती है। हमारी सरकार पिछले चार वर्षों में पाकिस्तान के साथ न तो कोई प्रामाणिक संबंध-सुधार सकी और न ही उसे कोई सबक सिखा सकी। हमारी कूटनीति और सैन्य नीति दोनों ही फिसड्डी साबित हो रही हैं।

 

-डॉ.वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

 

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