जयललिता, जिसने तोड़ा कुतर्कों का कुचक्र

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फिल्म स्टार, सीएम और अम्मा बन लाखों के दिलों पर राज करने वाली जयललिता की याद में आज भी कई लोग भावुक हो जाते हैं| वे एक ऐसी महिला थीं, जिन्होंने वर्षों से चले आ रहे कुतर्कों के कुचक्र को तोड़कर समाज में महिलाओं के लिए नया मुकाम हासिल किया| तमिलनाडु  की राजनीति को नई दिशा देना और वहां के जनमानस के मन में बसना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन जयललिता ने इसे भी मुमकिन कर दिखाया| तमिलनाडु ही नहीं भारतीय राजनीति की परिपाटी के अनुसार भी जयललिता ने नए-नए  प्रतिमान गढ़े| उन्होंने राजनीति में पुरुषों के वर्चस्व को ललकारते हुए राज किया और संकीर्ण सोच की उपेक्षा की|

अपने नाम के जैसे ही जयललिता का स्वभाव भी था| दरअसल, संस्कृत में उनके नाम का अर्थ होता है ऐसा इंसान, जो हंसते-खेलते विजय हासिल कर ले| वहीं हिन्दी के अनुसार भी जयललिता का अर्थ ‘विजय देवी दुर्गा’ होता है| उन्होंने जिस भी क्षेत्र में कदम रखा, वहां विजय ही हासिल की|

एक अभिनेत्री से राजनेता बनी तमिलनाडु की भूतपूर्व मुख्यमंत्री जयललिता कई कारणों से सुर्खियों में रहीं| उन्होंने कई कीर्तिमान अपने नाम किए| दुनिया के संघर्षों ने उन्हें निष्ठुर और निर्मम लौह महिला बना दिया, ऐसी महिला बना दिया, जो रुपया, ग्लैमर, सत्ता व राजनीति के हर खेल की माहिर खिलाड़ी बन गईं|  वे तमिल की जनता की अम्मा कहलाई |

जयललिता के मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए| उनका जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर में हुआ था| वे बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं| पढ़ाई से लेकर खेलकूद और अन्य में भी वे हमेशा ही अव्वल रहीं| उन्होंने अपनी मां संध्या के कहने पर फ़िल्मी दुनिया में बहुत छोटी उम्र में कदम रखा था| उनकी मां उन्हें सफल अभिनेत्री बनने का सपना बन रही थीं क्योंकि वे खुद भी तमिल फिल्मों की अच्छी एक्ट्रेस रह चुकी थीं|

जयललिता को गहने कार और विलासिता वाली वस्तुएं अति प्रिय थी| उनके मरने के बाद उनके पास से लगभग 30 किलो हीरे जड़ित सोने के गहने, 10 हजार महंगी साड़ियां, 750 जोड़ी जूतियां, 91 डिजाइनर घड़ियां और 19 महंगी गाड़ियां बरामद की गईं|

केवल 15 वर्ष की उम्र में फ़िल्मी दुनिया में कदम रखकर जयललिता ने दर्शकों के दिलों पर राज़ किया| उन्होंने तमिल, तेलुगु और कन्नड़  में 140 से अधिक फिल्मों में काम किया| जैसा कि उनके नाम का ही अर्थ है विजय हासिल करना, वैसे ही वे फ़िल्म जगत में एक शक्तिशाली अभिनेत्री के रूप में उभरीं और वर्ष 1973 में तमिल फिल्म ‘पट्टीकडा पट्टनामा’ का सम्मान हासिल किया|

जयललिता के मेंटर थे एमजीआर

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार एमजीआर ने जयललिता के साथ 28 फिल्मों में काम किया, लेकिन जल्द ही उनका फिल्मी दुनिया से मन भर गया और वे उसे छोड़कर राजनीति में चले गए|

एमजीआर ने  ही अन्नाद्रमुक का गठन किया था| वे ही जयललिता को राजनीति में लेकर आए और 1983 में पार्टी सचिव नियुक्त कर दिया| एमजीआर के निधन के बाद जयललिता ने पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथ में ले ली| इसके बाद उन्होंने 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री का ताज पहना|

जब जेल गईं जयललिता

27 सितंबर 2014 को बंगलुरु की एक अदालत ने जयललिता को चार साल जेल की सज़ा सुनाई| दरअसल, उन पर आय से अधिक सम्पत्ति का केस चल रहा था, जिसमें उन्हें दोषी साबित किया गया| भ्रष्टाचार के कई आरोपों और विवादों के बावजूद जयललिता ने 1991, 2002 और 2011 में विधानसभा चुनाव जीते| 27 सितम्बर 2014 को सज़ा भी हुई और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा, पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने 11 मई 2015 को उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद वे फिर से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गईं|

5 दिसंबर 2016 को लंबी बीमारी के बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनका निधन हो गया, जिससे तमिल की राजनीति में एक महान युग का अंत हो गया| उनका तमिलनाडु के लोगों के साथ एक असाधारण जुड़ाव था, जो आज भी देखा जा सकता है| आज भी कई लोग उन्हें देवी के रूप में पूजते हैं|

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