जम्मू-कश्मीर: निकाय चुनावों में मतदाताओं को आगे आना होगा

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जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुए, लेकिन इसमें एक बात सामने आई है कि राज्य दो अलग-अलग धारणाओं में बंटा हुआ है। घाटी में मतदान का प्रतिशत कम रहा, जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मतदाताओं ने अपने वोट का सबसे ज्यादा उपयोग किया। इससे यह तो साफ हुआ कि अलगाववादियों का असर केवल काश्मीर तक सीमित है। राज्य के दो इलाके जम्मू और लद्दाख पूरी मजबूती से खड़े हैं। भले ही घाटी से मतदाताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में हिस्सा कम लिया हो, लेकिन उनका यह कदम सराहनीय है और आतंकवादियों और अलगाववादियों के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा है।

इस बार आतंकवादियों ने मतदाताओं को डराया-धमकाया था। यह कहना तो सच नहीं है कि जनता ने आतंकवादियों और अलगाववादियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। वे उनकी  धमकियों से नहीं डरे। काश्मीर की कुछ नगरपालिकाओं के कई वार्डों में एक भी व्यक्ति ने चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। इससे यह तो साफ है कि आतंकवादी अपना डर कायम करने में सफल ज़रूर रहे।

2005 में हुए नगर निकायों के चुनावों में घाटी में करीब 45 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। इस बार चार चरणों के चुनाव में दो चरणों के मतदान ने साबित कर दिया कि घाटी की स्थिति नाजुक है। राज्य की दोनों पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने चुनाव से बहिष्कार कर दिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने चुनाव के बहिष्कार के लिए अनुच्छेद 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को जिम्मेदार बताया है। हालांकि दोनों ही दल यह बताने में असफल रहे कि निकाय चुनावों में बहिष्कार से वहां की जनता को क्या फायदा होगा। आतंकवादियों और अलगाववादियों के डर और राजनीतिक दलों के चुनाव बहिष्कार के चलते घाटी के काफी मतदाताओं ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मतदान से दूर रहने वाले लोग आतंकियों और अलगाववादियों का साथ दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव काफी महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार विकास कार्यों के लिए जो भी फंड जारी करती है, वह सीधा इन्हीं संस्थाओं को मिलता है। पंचायतों में यही नतीज़ा है कि इनके चुनाव आतंकवादियों और अलगाववादियों के नज़रों में रहते हैं इसलिए वे लोकसभा और विधानसभा में मौन धारण करे रहते हैं और निकाय चुनाव में  उत्पात मचाते हैं।

ऐसे में इन अलगाववाद और आतंकवादियों के नापाक इरादों को ध्वस्त करना बेहद जरूरी है। यह कार्य तभी सफल होगा, जब मतदाता एकजुट होकर मतदान करेंगे। उम्मीद है कि मतदाता अपने घरों से निकलकर आतंकवादियों और अलगाववादियों के इरादों को नष्ट करेंगे और लोकतंत्र में सहयोग देंगे।

-कुशाग्र वालुस्कर

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