विश्व विकलांग दिवस  : सफलता की उड़ान

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आज ‘विश्व विकलांग दिवस’ मनाया जा रहा है| इस मौके पर पूरे विश्व में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है| यह दिन दिव्यांगों के प्रति लोगों के रवैये में बदलाव लाने के साथ ही दिव्यांगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है| इस वर्ष इसकी थीम ‘विकलांग व्यक्तियों को सशक्त बनाओ और उनके समावेश और समानता को सुनिश्चित करो’ है|

प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को ‘विश्व विकलांग दिवस’ के रूप में मनाया जाता है| आज हम आपको कुछ ऐसे लोगों की कहानी बता रहे हैं, जो पंखों के सहारे नहीं बल्कि हौसलों के दम पर सफलता की उड़ान भरते हैं| यह ज़रूरी नहीं है कि कोई दिव्यांग है तो उसके अंदर नकारात्मकता ही भरी रहे| ऐसे बहुत सारे लोग मिल जाएंगे, जो शारीरिक कमी को अपनी सफलता में रोड़ा नहीं बनने देते हैं| ऐसे ही कुछ सफलता की कहानी हम आपको बता रहे हैं|

# विराली मोदी, जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन आज वे एक सामाजिक कार्यकर्ता, लेखिका और अभिनेत्री भी हैं| उन्होंने वर्ष 2014 की मिस व्हीलचेयर इंडिया प्रतियोगिता में भी भाग लिया था| बुखार और लकवे के कारण वे व्हीलचेयर पर तो आ गईं, लेकिन उनके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े| उन्हीं के प्रयासों का नतीजा है कि आज केरल में चार रेलवे स्टेशनों पर दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाओं का इंतजाम है|

# शालिनी सरस्वती, जो भरतनाट्यम नृत्यांगना रह चुकी हैं| उन्हें पांच साल पहले एक बीमारी के कारण अपने हाथ-पैर गंवाने पड़े| जिस दिन उनके दोनों पैर काटे जाने थे, उस दिन वे पैरों में चमकती लाल नेलपॉलिश लगाकर अस्पताल पहुंची थीं| वे दुखी होकर नहीं रुकी बल्कि उन्होंने नए तरीके से जीवन शुरू किया| आज शालिनी 10 किलोमीटर की मैराथन भी पूरी कर चुकी हैं, जो 2020 पैरालिम्पिक में भाग लेने की तैयारी कर रही है|

# प्रो.अनिल कुमार अनेजा, जो न सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, बल्कि 100 फीसदी दृष्टिहीन होने के बावजूद बरसों से दृष्टिहीनों के हक की लड़ाई कई मोर्चों पर लड़ रहे हैं| उनका मानना है कि संघर्ष करो, समझौता नहीं और इस सोच के साथ उन्होंने सेंट स्टीफंस में पहली बार हिंदी डिबेट और हिंदी नाटक शुरू करवाया| दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमफिल और पीएचडी करने के बाद अनिल ने 1977 में रामजस कॉलेज में इंग्लिश पढ़ाना शुरू किया| 2014 में उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया|

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