पुलिस की कॉलर पर नया तमगा

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पुलिस की कॉलर पर खुशी अग्रवाल एक तमगा और चस्पा कर गई। उसकी आत्महत्या को कुरेदती पुलिस को पता चला कि वह ड्रग एडिक्ट थी। और सुनो, पुलिस कह रही है कि इंदौर में अवैध नशीले पदार्थ यानी ड्रग्स आसानी से मिल जाती है। कहीं भी, कभी भी, किधर भी शहर के हर कोने में ड्रग्स ईजी अवेलेबल है। पुलिस यह बात अपने काम पर सवालिया निशाने लगाते हुए कह रही है या वह अपराधियों के बेखौफ हो जाने की बात कह रही है।

पुलिस के आला अफसरों की फौज, थानों का बड़ा अमला और क्राइम ब्रांच के होते ड्रग्स की आसानी से उपलब्धि को क्या कहें। नशे में उड़ता इंदौर शाम ढलते ही मस्त और झूमता नज़र आ जाता है। सरकारी ठेकों पर भीड़ बताती है कि युवकों में शराब की लत बढ़ती जा रही है। एक जमाने में शहर के विभिन्न मोहल्लों में दूध के कड़ाव पर भीड़ मूंछ पर ताव देते शहर की पहचान थी|

अब ठेकों के आसपास फुटपाथ पर नशे में धुत पड़े युवाओं ने उड़ते इंदौर की पहचान बनाई है। पब और क्लबों की नई संस्कृति पर गर्व करें या शर्म करें, जहां नवयौवनाएं ड्रग्स की तरंग में उड़ रही हैं, भारतीय परंपराओं और स्त्री की मर्यादा को तक पर रखकर हुक्के फूंक रही है। पुलिस यह यब देख रही है या उसे पता ही नहीं है। पुलिस की तमाम खुफिया एजेंसियां, मुखबिर सिस्टम क्या कर रही है।

बंबई बाजार की भीतरी गलियों, खजराना, चंदननगर, आजादनगर, सिरपुर, द्वारकापुरी क्षेत्र में धड़ल्ले से ड्रग्स की पुड़ियाएं बिक रही हैं। हेरोइन, चरस, गांजा चौराहे-चौराहे पर उपलब्ध है। बीट सिस्टम ध्वस्त है। नियुक्त पुलिस दलाल, पोटलीबाजों से संपर्क में है, पर अपराधियों पर उनकी पकड़ नहीं है। अपराधियों की तरफ नज़र नहीं है ऐसा नहीं है| चांदी काटने के लिए छूट देना ज़रूरी है, फिर चाहे धड़ल्ले से नशा बिके । आजकल नया ट्रेंड चल पड़ा है, बाहरी कॉलोनियों के खाली प्लॉटों पर अवैध शराब और नशीले पदार्थों का स्टॉक उगती गाजर घास में रखकर अवैध कारोबार चल रहा है। पुलिस, रसूखदार लोग, धंधेबाज सबकी मिलीभगत से बेखौफ चल रहा है यह कारोबार।

-सतीश जोशी

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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