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क्रोएशिया ने दिखाया भारत को आईना…

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फीफा वर्ल्ड कप  2018 टूर्नामेंट का 18 वां संस्करण था, जिसमें दुनिया की तमाम टीमों को हराकर फ्रांस और क्रोएशिया ने खिताबी मुकाबले में जगह बनाई| हालांकि इस मुकाबले का ताज फ्रांस ने जीता, लेकिन दिल जीतने का काम क्रोएशिया ने किया| क्रोएशिया ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबका दिल जीता| क्रोएशिया के शानदार प्रदर्शन से भारत को भी सबक लेना चाहिए क्योंकि भारत की तरह वह भी कभी गुलाम था|

क्रोएशिया आज से महज 28 साल पहले ही आजाद हुआ है| वहां की कुल आबादी लगभग 42 लाख है, को भारत के शहरों की आबादी से भी कम है| क्रोएशिया बहुत कम समय में एक मजबूत राष्ट्र बनकर उभरा है| सवाल यह है कि महज तीन दशक से कम समय में सीमित संसाधन और आज तक दुनिया में अपने अस्तित्व को तरसते इस देश ने इस तरह का चमत्कार किया कैसे? भारत में अधिकतर लोगों को क्रोएशिया का नाम तब पता चला, जब उस देश की टीम फाइनल में  पहुंच गई| अब सब यही सोच रहे हैं कि जरा सा दायरा, कम आबादी, दुनिया से दूर और अदनी सी जीडीपी के साथ इस देश की इतनी बड़ी कामयाबी का राज़ क्या है? शायद ईमानदारी से की जाने वाली सियासत तो नहीं!

अब आप कहेंगे कि खेल और सियासत का आपस में क्या ताल्लुक? तो दोनों के बीच में रिश्ता यह रहा होगा कि शायद वहां  के नेताओं को मुद्दों की राजनीति करना नहीं आती होगी| यदि मुद्दे बनते भी होंगे तो उन्हें झट से सुलझा लिया जाता होगा| सही नीयत से किया जाने वाला सतत विकास आज इस देश को यहां ले आया है | वहीं भारत जो कि दायरे, आबादी और दुनिया की नज़र में साख के मामले में इस मुल्क से कहीं आगे है, को अब क्रोएशिया सबक सिखा रहा है|

आजादी के पहले से चले आ रहे मुद्दों में उलझा भारत अब उनके साथ जीने की कला सीख गया है| भारत अब उन्हीं मुद्दों के साथ आगे बढ़ रहा है| अब तो मुद्दे भी खुद पर शर्मिंदा हैं कि वे किस मुल्क के मुद्दे बन गए, जहां उन्हें कोई देखने वाला भी नहीं है| यदि उन मुद्दों को देखा भी जाता है तो सिर्फ सियासी रोटी सेंकने के लिए| उन मुद्दों में से कुछ अजर अमर मुद्दे हैं तो कुछ मुद्दे तत्काल बना लिए जाते हैं, जिनकी उम्र महज कुछ दिनों या सप्ताह की होती है| परंतु जो भी हो मुद्दों में उलझाकर सियासी दांव खेलते हुए देश को विकास के सपने दिखाने में हम पारंगत हो गए हैं| यह बात क्रोएशिया में नहीं है, उसे ये सब कहां आता है| वो तो बस विकासशील  से विकसित होने की दौड़  में लगा है| हम मन समझा लेने के लिए खुद को दुनिया की सबसे बड़ी छठी अर्थव्यवस्था बना चुके हैं, लेकिन समय-समय पर ऐसे कई क्रोएशिया भारत को आईना दिखा जाते हैं फिर भी हम वहीं के वहीं हैं|

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