अंतरिक्ष में ‘इसरो’ की बढ़ती ताकत

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भारत से अब तक के सबसे भारी-भरकम उपग्रह जीसैट-11 को सफलतापूर्वक लॉन्च करने के बाद ‘इसरो’ ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। ‘इसरो’ ने देश को 35वां सेटेलाइट जीसैट-7 ए दिया है। इसरो ने 5 दिसंबर को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एरियानेस्पेस के फ्रेंच गुआना से संचालित सेटेलाइट जीसैट-11 के सफल प्रक्षेपण के बाद ही अपनी 35वीं संचार सेटेलाइट जीसैट-7 ए के प्रक्षेपण की घोषणा कर दी थी।

आइए जानते हैं जीसैट-7ए से जुड़ी ख़ास बातें…

– जीसैट-7ए का वजन 2250 किलोग्राम है।

– जीसैट-7ए भारत में केयू-बैंड उपभोक्ताओं की संचार क्षमता को बढ़ाएगा।

– जीसैट-7ए भारतीय वायुसेना के लिए संचार सुविधाएं बढ़ाएगा।

– जीसैट-7ए आठ साल तक सेवाएं देगा।

– जीसैट-7ए से पहले इसरो ने अब तक का सबसे भारी भारतीय रॉकेट जीसैट-11 को फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया था। जीसैट-11 की खास बात है कि वह 16 जीबी प्रति सेकंड की रफ्तार से डेटा भेजने में मददगार है।

नए साल में चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग

चंद्रयान-2 भी लॉन्च होने के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान-2 को 31 जनवरी 2019 को लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। पहला ऑर्बिटर, जो चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। दूसरा हिस्सा है लैंडर-विक्रम, जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और तीसरा हिस्सा होगा रोवर, जो चंद्रमा की सतह पर चलते हुए अलग-अलग परीक्षण करेगा।

जीसैट-11 की खासियत

– यह उच्च बैंडविड्थ संपर्क प्रदान करने में सक्षम है।

– जीसैट-11 5,854 किलोग्राम का है।

– इसकी लागत 500 करोड़ रुपए है।

– इसके हर एक सौर पेनल की लंबाई 4 मीटर है।

– इससे देश में इंटरनेट की रफ्तार में सुधार आएगा।

– ज्यादा से ज्यादा इंटरनेट उपभोक्ताओं के डाटाबेस का संचालन करने में मदद मिलेगी।

– ग्राम पंचायतों को इसके जरिये कवर किया जाएगा, जिससे ई-गर्वनेंस को फायदा मिलेगा।

संचार उपग्रह की शुरुआत

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट) प्रणाली पृथ्वी की कक्षा में स्थापित 9 प्रचलनात्मक संचार उपग्रहों सहित एशिया पैसिफिक क्षेत्र में सबसे बड़े घरेलू संचार उपग्रहों में से एक है। इसकी शुरुआत 1983 में इनसैट-1बी की स्थापना से हुई। वर्तमान में प्रचलनात्मक संचार उपग्रह है इनसैट-3ए, इनसैट-3सी, इनसैट-4ए, इनसैट-4बी, इनसैट-4 सीआर, जीसैट-6, जीसैट-7, जीसैट-8, जीसैट-9, जीसैट-10, जीसैट-12, जीसैट-14, जीसैट-15, जीसैट-16, जीसैट-18। सी, विस्तारित सी और केयू बैण्डोंग में 200 से ज्यादा ट्रांसपोंडर्स सहित यह प्रणाली दूरसंचार, दूरदर्शन, प्रसारण, उपग्रह समाचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी और खोज और बचाव कार्यों में सेवाएं दे रही हैं।

इंटरनेट क्रांति में बदलाव

देश में इंटरनेट क्रांति के लिए पांच उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना है। इनमें से जीसैट-19, जीसैट-29 पहले ही प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। जीसैट-11 5 दिसंबर को छोड़ा गया। जीसैट-7ए लॉन्च हो गया है। वहीं जीसैट-20 को अगले वर्ष प्रक्षेपित किया जाएगा।

डेड रॉकेट पर काम

इसरो डेड रॉकेट को भी उपयोग में लेगी। इसरो एक ऐसी तकनीक पर काम रहा है, जिससे वह स्पेस एक्सपेरिमेंट्स के लिए पीएसएलवी रॉकेट के लास्ट स्टेज का उपयोग करेगा। इसरो पीएसएलवी सी44 में इस नई तकनीक का प्रदर्शन करेगा।

प्रदूषण पर नज़र रखेगा PSLV-C43

‘इसरो’ ने PSLV-C43 रॉकेट से भारत का हाइसिस सैटेलाइट लॉन्च कर दिया है। PSLV-C43 रॉकेट प्रदूषण की मॉनिटरिंग करेगा। PSLV-C43 की लंबाई 44 मीटर है। इसमें कुल 11 सैटेलाइट हैं, जिनका कुल भार 261.5 किलोग्राम है। ये रॉकेट हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिससे धरती के चप्पे-चप्पे पर नज़र रखी जा सकेगी।

नए साल में इसरो के प्लान

नए साल की शुरुआत भी ‘इसरो’ धमाकेदार करने वाला है। इसकी शुरुआत चंद्रयान 2 के लॉन्च से होगी। वहीं फरवरी में पीएसएलवी सी-46 रॉकेट सैटेलाइट्स कार्टासैट-3 और नेमो एएम लॉन्च होंगे। मार्च में इसरो रीसैट-2बीआर 1, रीसैट-2 बी, कार्टोसैट-3 और रीसैट-2बीआर सैटेलाइट्स लॉन्च किए जाएंगे।

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