न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से बढ़ेगी महंगाई

0

केंद्र सरकार ने 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा  किया है| इसके तहत सरकार ने खरीफ की फसल पर लागत की डेढ़ गुना कीमत देने का दावा किया है| वहीं एग्री  विशेषज्ञों  का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी| इसके अलावा इससे एग्री एक्सपोर्ट को भी झटका लगेगा| इसका कारण यह है कि मौजूदा समय में  अंतरराष्ट्रीय बाजार में उन चीजों की कीमतें कम हैं, जिन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य  बढ़ा है|  ऐसे में इन चीजों  का निर्यात मुश्किल हो जाएगा|

महंगाई पर होगा असर

एग्री एक्सपर्ट्स की मानें तो न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से कीमतें बढ़ेंगी| उदाहरण के लिए धान पर सरकार ने प्रति क्विंटल 200 रुपए का इज़ाफ़ा किया है| इस पर खरीदार को 15 फीसदी मंडी शुल्क देना होगा| इसके अलावा प्रोसेसिंग पर आने वाली लागत भी इसमें जोड़ ली जाए तो चावल की कीमत में इज़ाफ़ा होना तय है| इससे महंगाई में इज़ाफ़ा होगा|

कॉटन और पोल्ट्री इंडस्ट्री को लगेगा झटका

कॉटन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार ने 25 फीसदी का इज़ाफ़ा किया है|  इसकी वजह से अपैरल इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल 25 फीसदी तक महंगा हो जाएगा| अपैरल  इंडस्ट्री निर्यात के मोर्च पर पहले ही मुश्किलों का सामना कर रही है| ऐसे में अपैरल इंडस्ट्री के लिए निर्यात और महंगा हो जाएगा| इसी तरह मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य  को 1300 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए कर दिया है|  इससे पोल्ट्री इंडस्ट्री की लागत बढ़ जाएगी|

फूड इन्फ्लेशन बढ़ने की आशंका

इंडिया रेटिंग के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य  बढ़ने पर महंगाई बढ़ेगी| पहले दौर में इसका असर होलसेल इन्फ्लेशन 38बीपी होने का अनुमान है| फूड इन्फ्लेशन पर असर 19 बीपी कम होने की संभावना है, जो कुल प्रभाव का आधा है| चूंकि होलसेल फूडग्रेन इन्फ्लेशन पिछले 13 महीने में नकारात्मक रही है इसलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य  में बढ़ोतरी से इन्फ्लेशन बढ़ने की संभावना है| हालांकि, रिटेल फूडग्रेन इन्फ्लेशन पर प्रभाव बढ़कर 28बीपी रहने का अनुमान है|

Share.